Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Wednesday, 7 October, 2026 • 03:00 pm
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » CM सम्राट बोले- बिहार का मखाना बना ग्लोबल सुपरफूड, दुनिया की थाली तक पहुंचा
बिहार

CM सम्राट बोले- बिहार का मखाना बना ग्लोबल सुपरफूड, दुनिया की थाली तक पहुंचा

August 19, 2026No Comments7 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

auto

Patna : बिहार के तालाबों से निकलने वाला मखाना अब दुनिया की थाली में अपनी जगह बना रहा है। कभी व्रत और त्योहारों तक सीमित रहने वाला यह पारंपरिक खाद्य आज हेल्थ फूड के तौर पर अमेरिका, कनाडा, UAE और यूरोप के बाजारों तक पहुंच चुका है। देश के कुल मखाना उत्पादन में करीब तीन-चौथाई हिस्सेदारी रखने वाला बिहार अब इसकी खेती के साथ प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार का मखाना अब दुनिया की थाली तक पहुंच रहा है। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और केंद्र की 476.03 करोड़ रुपए की योजना से किसानों को बेहतर बीज, नई तकनीक और बड़े बाजार से जोड़ने की तैयारी है।

उत्तर बिहार बना मखाने का सबसे बड़ा केंद्र

मखाना बिहार की पुरानी कृषि परंपरा से जुड़ा है। इसकी खेती मुख्य रूप से तालाबों, झीलों और जलभराव वाले क्षेत्रों में होती है। उत्तर बिहार में इसकी खेती सबसे ज्यादा होती है। कोसी क्षेत्र के सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के अलावा मिथिला और सीमांचल के कई इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर मखाना उगाते हैं। कई परिवारों के लिए यह सिर्फ खेती नहीं, बल्कि सालभर की आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया है।

Advertisement

भारत दुनिया में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक है। 2024-25 में देश में मखाने का उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा था। 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान में उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन पहुंच गया है। बिहार में इसी अवधि में करीब 60 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के मखाना कारोबार में बिहार की हिस्सेदारी कितनी बड़ी है।

तालाब की खेती से आधुनिक तकनीक तक का सफर

मखाने की खेती अब धीरे-धीरे पुराने तरीकों से आगे बढ़ रही है। पहले इसकी खेती मुख्य रूप से तालाबों में होती थी। अब फील्ड सिस्टम से खेती और बेहतर किस्मों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी किस्मों से उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि मखाने की खेती आज भी काफी मेहनत वाला काम है। फसल की देखभाल से लेकर बीज निकालने तक किसानों को पानी के अंदर उतरना पड़ता है। कई जगह बीज निकालने और दूसरे काम हाथ से ही किए जाते हैं। ऐसे में मशीनीकरण बढ़ने से किसानों की मेहनत और लागत दोनों कम हो सकती हैं।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड से किसानों को बड़ी उम्मीद

केंद्र सरकार ने 2025-26 के बजट में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। बिहार में 15 सितंबर 2025 को इसकी औपचारिक शुरुआत हुई। इसका मकसद मखाना क्षेत्र को सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उत्पादन से लेकर बाजार और निर्यात तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है।

मखाना क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक 476.03 करोड़ रुपए की योजना मंजूर की है। इसके तहत बेहतर बीज उपलब्ध कराने, रिसर्च बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने, कटाई और कटाई के बाद की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के साथ मखाने की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी काम किया जा रहा है।

इस योजना के तहत 2025-26 के लिए 30 करोड़ और 2026-27 के लिए 90 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। अतिरिक्त 1,010 हेक्टेयर क्षेत्र को मखाना खेती के तहत लाया गया है। 73 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाया गया है। किसानों को नई तकनीक दिखाने के लिए 89 फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन किए गए हैं। प्रशिक्षण और दूसरे कार्यक्रमों के जरिए 2025-26 में देशभर के 8,159 किसान लाभान्वित हुए हैं।

मांग बढ़ी तो कीमत भी ढाई गुना हुई

मखाने की बढ़ती मांग का असर इसकी कीमत पर भी दिखाई दे रहा है। 2020 से 2022 के दौरान मखाने की औसत कीमत करीब 500 रुपए प्रति किलो थी। 2025 में यह बढ़कर करीब 1,250 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। यानी कुछ वर्षों में कीमत ढाई गुना तक बढ़ी है।

उत्पादन की तुलना में मांग तेजी से बढ़ने को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। 2022 से 2025 के बीच उत्पादन में करीब 4 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि हेल्थ फूड और पैकेज्ड स्नैक की मांग तेजी से बढ़ी। अनुमान है कि 2029-30 तक देश का घरेलू मखाना बाजार 11 से 12 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

देश में हर महीने करीब 3,000 से 3,500 मीट्रिक टन पॉप्ड मखाने की खपत होती है। त्योहारों और व्रत के दौरान यह मांग बढ़कर करीब 5,000 मीट्रिक टन तक पहुंच जाती है। ब्रांडेड कंपनियों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ रही है, जबकि छोटे शहरों और कस्बों में खुले मखाने की मांग अभी मजबूत बनी हुई है।

अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार, यूरोप में ज्यादा कीमत

मखाने की मांग अब विदेशों में भी बढ़ रही है। वर्ष 2025 में पॉप्ड मखाना और दूसरे मखाना उत्पादों के लिए अलग एचएसएन कोड जारी किया गया। इससे निर्यात का अलग आंकड़ा सामने आने लगा।

2025-26 में भारत ने 7,264.89 मीट्रिक टन मखाना उत्पादों का निर्यात किया। इसकी कीमत करीब 192.96 करोड़ रुपए रही। अमेरिका भारत के मखाना निर्यात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा लेता है। कनाडा की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और UAE की 17 प्रतिशत है। यानी इन तीन देशों को मिलाकर करीब 77 प्रतिशत निर्यात होता है।

हालांकि कुछ छोटे बाजारों में भारतीय मखाने को ज्यादा कीमत मिल रही है। जर्मनी में औसत कीमत करीब 26 डॉलर प्रति किलो, नेपाल में 21.6 डॉलर और ऑस्ट्रेलिया में करीब 21 डॉलर प्रति किलो है। इससे साफ है कि आगे चलकर ज्यादा कीमत देने वाले बाजारों पर ध्यान देकर निर्यात से होने वाली कमाई बढ़ाई जा सकती है।

सादा मखाना अब फ्लेवर्ड स्नैक भी

बाजार में अब सिर्फ सादा मखाना नहीं बिक रहा है। कंपनियां फ्लेवर्ड मखाना, रेडी टू ईट स्नैक, मखाना आटा और दूसरे उत्पाद भी बना रही हैं। इससे मखाने की कीमत बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। मखाना तैयार होने से पहले कई चरणों से गुजरता है। खेत या तालाब से बीज निकालने के बाद उसे साफ और सुखाया जाता है। फिर तेज तापमान पर भूनकर पॉप किया जाता है। इसके बाद ग्रेडिंग, पॉलिशिंग और पैकेजिंग होती है। बड़े और अच्छी गुणवत्ता वाले मखाने की कीमत बाजार में ज्यादा मिलती है।

रिसर्च और मशीनों से बदल रहा काम

राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र मखाना किसानों को बेहतर तकनीक उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। केंद्र ने उच्च उत्पादकता वाले मखाने के 15,824.1 किलो बीज किसानों और संस्थानों को उपलब्ध कराए हैं। 2012 से 2023 के बीच 3,000 से ज्यादा किसानों को खेती, प्रसंस्करण और मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया गया।

मखाना बीज धोने की मशीन, बीज ग्रेडर, रोस्टिंग मशीन, पॉपिंग मशीन और पॉप्ड मखाना ग्रेडर जैसी तकनीक भी विकसित की गई है। इनसे आने वाले समय में मखाना प्रसंस्करण का काम आसान होने और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।

सेहत ने बढ़ाई मखाने की लोकप्रियता

मखाने में प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें वसा की मात्रा कम होती है और यह कोलेस्ट्रॉल मुक्त खाद्य पदार्थ है। इसी वजह से सेहत को लेकर जागरूक लोगों के बीच इसकी मांग बढ़ी है।

CM सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन से बिहार के मखाने को दुनिया के बाजार में आगे बढ़ने का मौका मिला है। बिहार के तालाबों से निकलने वाला यह पारंपरिक उत्पाद अब विदेशी बाजार में पहचान बना चुका है। अगर किसानों को बेहतर बीज, तकनीक, प्रसंस्करण की सुविधा और सही बाजार मिलता रहा तो मखाना आने वाले वर्षों में बिहार के किसानों की कमाई और ग्रामीण रोजगार का मजबूत आधार बन सकता है।

इसे भी पढ़ें : सम्राट कैबिनेट की बड़ी सौगात : इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर AI तकनीक तक, 13 बड़े प्रस्ताव पास

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous ArticleUPPSC ने निकाली 1156 पदों पर Vacancy, आवेदन शुरू
Next Article सीएम सम्राट ने कोसी-मेची परियोजना की परखी रफ्तार, दे गये ये हिदायत

Related Posts

जॉब/एजुकेशन

SSC CHSL से असिस्टेंट प्रोफेसर तक, 5,259 पदों पर आवेदन का आज आखिरी मौका

October 7, 2026
जॉब/एजुकेशन

ग्रेजुएट हैं तो तुरंत करें आवेदन, सुप्रीम कोर्ट में JCA के 250 पदों पर Vacancy

October 7, 2026
बिहार

बिजली योजनाओं पर मंत्री लेशी सिंह सख्त, बोलीं लापरवाही हुई तो होगी कार्रवाई

October 7, 2026
Advertisement
Advertisement
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

SSC CHSL से असिस्टेंट प्रोफेसर तक, 5,259 पदों पर आवेदन का आज आखिरी मौका

October 7, 2026

ग्रेजुएट हैं तो तुरंत करें आवेदन, सुप्रीम कोर्ट में JCA के 250 पदों पर Vacancy

October 7, 2026

राशिफल @ 07 अक्टूबर 2026… आज क्या कहता है आपका भाग्य… जानें

October 7, 2026

बिजली योजनाओं पर मंत्री लेशी सिंह सख्त, बोलीं लापरवाही हुई तो होगी कार्रवाई

October 7, 2026

बिहार में अब कागजों पर नहीं दिखेगा कायाकल्प, 96 हजार कामों पर सरकार की सीधी नजर

October 6, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.