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Unnao (Pawan Kumar) : तकनीकी पढ़ाई का दायरा अब सिर्फ क्लासरूम की किताबों, रटने की आदत और कंप्यूटर स्क्रीन पर लिखी चंद कोडिंग लाइनों तक सीमित नहीं रह गया है। आज की तेजी से बदलती दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डेटा एनालिसिस जैसी आधुनिक तकनीकें काम करने के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदल रही हैं। ऐसे दौर में एक युवा इंजीनियर के लिए सिर्फ थ्योरी जानना काफी नहीं है, बल्कि उसके पास साइबर दुनिया की असली समस्याओं को समझने और उनका तुरंत समाधान खोजने का हुनर होना भी बेहद जरूरी है। इसी सोच और विज़न के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश (सीयू-यूपी) में नेशनल इंजीनियर्स डे के खास मौके पर ‘हैक2 इनोवेट’ का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य मकसद देश भर के उभरते हुए युवा इंजीनियर्स की साइबर सिक्योरिटी स्किल्स को परखना और उन्हें इंडस्ट्री की व्यावहारिक जरूरतों के लिए तैयार करना था।
ऑनलाइन सीटीएफ से ग्रैंड फिनाले तक का कड़ा मुकाबला
इस दो दिवसीय साइबर महासंग्राम की शुरुआत 13 सितंबर को 10 घंटे के मैराथन ऑनलाइन सीटीएफ यानी ‘कैप्चर द फ्लैग’ मुकाबले के साथ हुई। इस दौर में 20 से ज्यादा अलग-अलग यूनिवर्सिटीज के लगभग 200 होनहार छात्र-छात्राओं ने अपनी दिमागी ताकत का प्रदर्शन किया। ऑनलाइन लीडरबोर्ड पर हुए कड़े मुकाबले और बेहतरीन स्कोर के आधार पर टॉप-20 टीमों को चुना गया। इसके बाद असली चुनौती शुरू हुई 14 सितंबर को सीयू-यूपी कैंपस में, जहां 24 घंटे का ग्रैंड फिनाले आयोजित किया गया। इन चुनिंदा टीमों को सीमित समय के भीतर साइबर सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक और जटिल समस्याओं के लिए काम करने योग्य टेक्निकल प्रोटोटाइप और डिफेंस सॉल्यूशन तैयार करने थे।

एआई थ्रेट्स, डीपफेक और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी चुनौतियां
हैकाथॉन के दौरान छात्रों ने जिन विषयों पर काम किया, वे आज की डिजिटल दुनिया की सबसे बड़ी चिंताएं हैं। प्रतिभागियों ने एआई आधारित थ्रेट डिटेक्शन, एपीआई सिक्योरिटी, डेटा-लीक डिटेक्शन और फर्जी ऐप की पहचान करने जैसे गंभीर मुद्दों पर अपने सॉल्यूशन तैयार किए। इसके अलावा, डीपफेक तकनीक को पकड़ने, डिजिटल फॉरेंसिक्स, एंड्रॉयड एप्लिकेशन सिक्योरिटी, वेयरेबल डिवाइसेस की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर बने फर्जी अकाउंट्स की पहचान करने वाले मॉडल्स पर भी दिन-रात काम हुआ। 15 सितंबर को 24 घंटे की कठिन चुनौती पूरी होने के बाद टीमों ने इंडस्ट्री से आए अनुभवी जजों और अकादमिक रिसर्चर्स के सामने अपने बनाए प्रोटोटाइप की लाइव प्रदर्शन और पिचिंग की। इस हैकाथॉन में कुल 2 लाख रुपये तक के इनाम रखे गए हैं।
इंजीनियरिंग का असली टूल है ‘दिमाग’
कार्यक्रम के दौरान पहुंचे एक्सपर्ट्स ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि और आरडीएसओ की डायरेक्टर (सिग्नल) प्रियंका सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग का मतलब केवल डिग्री लेना या परीक्षा पास करना नहीं है। यह जिज्ञासा की एक यात्रा है और इसका असली उद्देश्य ऐसे इनोवेशन करना है जो देश और समाज की जिंदगी को आसान बनाएं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज एआई आपके लिए डेटा को आसान बना सकता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण टूल एक इंजीनियर का अपना दिमाग ही होता है। वहीं सीयू-यूपी के मैनेजिंग डायरेक्टर जय इंदर सिंह संधू ने बताया कि यूनिवर्सिटी का प्रयास छात्रों को केवल नौकरियों के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से जोड़कर नए इनोवेशन का जरिया बनाना है।
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