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Pawan Thakur, Ranchi
जब किसी बड़े मंच पर हुनर को पहचान मिलती है, तो वह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे राज्य की पहचान बन जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा नई दिल्ली के भव्य यशोभूमि सभागार में देखने को मिला, जहां इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (IAP) की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रांची के दो सीनियर डॉक्टरों ने झारखंड का मान बढ़ाया। एशिया के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर में सजी इस महफिल में राजधानी के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. दिनेश ठाकुर और डॉ. उमासेन गुप्ता को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष सम्मान से नवाजा गया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह दुनिया के 65 देशों से आए करीब 10 हजार फिजियोथेरेपिस्ट बने।

यशोभूमि में ज्ञान का महाकुंभ, विदेशी प्रतिनिधि भी रह गए दंग
सम्मेलन का आयोजन 26 और 27 सितंबर को वर्ल्ड एशिया पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस के तौर पर किया गया था। दो दिनों तक चले इस समागम में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, दर्द निवारण की नई पद्धतियों और न्यूरो रिहैबिलिटेशन से जुड़े कई अहम वैज्ञानिक सत्र आयोजित हुए। देश के कोने-कोने के साथ दुनिया भर से आए नामचीन विशेषज्ञों ने यहां अपने शोध पत्र पेश किए। इसके साथ ही भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरते सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने विदेशी मेहमानों को खासा प्रभावित किया। झारखंड से भी बड़ी तादाद में डॉक्टर इस सम्मेलन का हिस्सा बने और नए वैज्ञानिक अनुसंधानों से रूबरू हुए।

डॉ. दिनेश ठाकुर के चिकित्सकीय अनुभव और समर्पण की जमकर हुई सराहना
इस पूरे आयोजन में रांची के डॉ. दिनेश ठाकुर की भूमिका बेहद खास और प्रेरणादायी रही। चिकित्सा जगत में अपने शांत स्वभाव, सटीक डायग्नोसिस और मरीजों के प्रति सेवाभाव के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. दिनेश ठाकुर ने सम्मेलन के साइंटिफिक सेशन में चेयरपर्सन और जज की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। देश-विदेश के शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए रिसर्च पेपर्स का गहन मूल्यांकन करते हुए उन्होंने अपने विचार साझा किए, जिसे मंच पर मौजूद तमाम दिग्गजों ने सराहा।
डॉ. दिनेश ठाकुर लंबे समय से रांची के प्रसिद्ध देबूका अस्पताल और गुरुनानक अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जटिल से जटिल शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने और उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाने में उनका समर्पण हमेशा से मिसाल रहा है। सम्मेलन में उनकी इस क्लिनिकल विशेषज्ञता और अनुभव को खुले दिल से सराहा गया और उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया।

राज्य के चिकित्सा जगत में खुशी की लहर
सम्मेलन के अलग-अलग तकनीकी सत्रों में डॉ. उमासेन गुप्ता के साथ मिलकर डॉ. ठाकुर ने जिस कुशलता से वैज्ञानिक सत्रों का संचालन किया, उसने यह साबित कर दिया कि क्लिनिकल एक्सपर्टीज के मामले में झारखंड के डॉक्टर किसी से पीछे नहीं हैं। राजधानी के दोनों डॉक्टरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले इस मान-सम्मान से राज्य के डॉक्टरों और फिजियोथेरेपिस्टों में खुशी की लहर है। साथी चिकित्सकों का कहना है कि डॉ. ठाकुर की यह उपलब्धि युवा डॉक्टरों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगी।
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