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Ranchi : भारत निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा ने रांची में लोकभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भारी संख्या में जुटकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। झामुमो ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पद का गलत इस्तेमाल करने और मनमाने तरीके से फैसले लेने का आरोप लगाया है। पार्टी की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से फौरन हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख आज खतरे में पड़ गई है और इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
10 महीनों में 14 बार आपत्तियां, फिर भी करोड़ों नाम काटे गए
प्रदर्शन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया रिपोर्टों और सरकारी दस्तावेजों का हवाला देकर गंभीर आरोप लगाए। मंच से वक्ताओं ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपनी मनमर्जी से फैसले ले रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि आयोग के दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार लिखित रूप से इन फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद उनकी राय को दरकिनार कर दिया गया। नेताओं का आरोप है कि सहयोगी आयुक्तों की असहमति के बाद भी वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण के नाम पर देश भर के करोड़ों असली मतदाताओं के नाम काट दिए गए। झामुमो नेताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या और लोगों के वोट देने के अधिकार पर खुला हमला करार दिया।
पांच जिलों के कार्यकर्ताओं का जुटा हुजूम, दिग्गज नेता रहे मौजूद
लोकभवन के बाहर हुए इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन झामुमो की रांची जिला, रांची महानगर, खूंटी, लोहरदगा और रामगढ़ जिला कमेटियों ने मिलकर किया था। इस वजह से आसपास के जिलों से भी हजारों की तादाद में कार्यकर्ता राजधानी पहुंचे थे। आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक विकास मुंडा, अमित महतो, सुदीप गुड़िया और रामसुर्या मुंडा समेत कई बड़े नेताओं ने किया। इसके अलावा पार्टी की केंद्रीय समिति और जिला इकाइयों के प्रमुख पदाधिकारी मुस्ताक आलम, विनोद किस्कू, मोजम्मील अहमद और जुबेर अहमद समेत बड़ी संख्या में महिला और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने एक सुर में चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो यह आंदोलन केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में सड़क से लेकर संसद तक लड़ा जाएगा।
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