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Ranchi : झारखंड में बालू घाटों के संचालन, होल्डिंग टैक्स वसूली और अधर में लटकी सड़क परियोजनाओं को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर हेमंत सोरेन सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे हैं। मरांडी ने सीधे मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि अफसरों के भरोसे कुर्सी तो चल सकती है, लेकिन जनता के प्रति जवाबदेही से छुट्टी नहीं मिल सकती। सरकार में जिम्मेदारियां बांटने की रफ्तार जितनी तेज है, काम पूरा करने की रफ्तार उतनी ही गायब दिख रही है।
नीलामी का ढोल बजा, लेकिन फाइलों में अटकी मंजूरी
मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में 302 बालू घाटों की नीलामी का खूब प्रचार किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से 288 घाट अब भी बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि बालू चोरी के अवैध धंधे को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर इन घाटों को शुरू नहीं होने दिया जा रहा है। पर्यावरणीय मंजूरी, ग्रामसभा की सहमति और बाकी कागजी प्रक्रियाएं पूरी कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके स्तर पर लंबित पड़ी फाइलों का ब्योरा सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए। सिर्फ घाटों की नीलामी का ढोल पीटने से आम जनता का मकान नहीं बनेगा, लोगों को सही दाम पर बालू मिलने से ही राहत मिलेगी।
21 अगस्त से टैक्स वसूली बंद, 1410 करोड़ की सड़कें अधर में
पथ निर्माण और नगर विकास विभाग के कामकाज पर निशाना साधते हुए मरांडी ने कहा कि दोनों अहम महकमों की कमान संभाल रहे वरिष्ठ अधिकारी सुनील कुमार की व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी है। 21 अगस्त से राज्यभर में होल्डिंग टैक्स की वसूली बंद पड़ी है, क्योंकि पुरानी एजेंसी का करार खत्म कर दिया गया और नई व्यवस्था बनाई ही नहीं गई। निकाय स्तर पर वसूली ठप रहने से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है, जिसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने राजधानी रांची की 1,410 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं के लटकने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अधूरी सड़कों के चलते जनता रोजाना जाम और धूल-धक्कड़ की परेशानी झेल रही है। विज्ञापन बंद कराने का दबाव बनाकर अपनी खामियां छिपाने वाले अधिकारी यह न भूलें कि वक्त बदलने पर हर गड़बड़ी का पूरा हिसाब होता है।
मरांडी ने सरकार के सामने रखीं आठ मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने इन तमाम मुद्दों पर मुख्यमंत्री से समय सीमा तय कर सीधी कार्रवाई करने की मांग की है:
- 302 नीलाम घाटों में से बंद पड़े 288 घाटों के कारण और लंबित फाइलों की सूची जारी हो।
- पर्यावरणीय स्वीकृति और ग्रामसभा की अनुमति पूरी करने की तारीख तय की जाए।
- वैध घाटों से उचित दर पर पारदर्शी तरीके से बालू की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो।
- 21 अगस्त से ठप पड़ी होल्डिंग टैक्स वसूली को तुरंत बहाल करने की समयसीमा घोषित हो।
- टैक्स वसूली बंद रहने से हुए राजस्व नुकसान और भरपाई की योजना सार्वजनिक की जाए।
- रांची की 1,410 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की मौजूदा प्रगति रिपोर्ट जारी हो।
- इन सभी योजनाओं और घाटों की मासिक प्रगति रिपोर्ट आधिकारिक पोर्टल पर डाली जाए।
- लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सीधी कार्रवाई हो।
अंत में सीएम सम्राट चौधरी को सीधी चेतावनी देते हुए मरांडी ने कहा कि अफसर फाइलों पर सिर्फ टिप्पणी लिखकर बच निकलते हैं, लेकिन जनता सरकार के कार्यकाल पर अपना अंतिम फैसला सुनाती है। यदि मुख्यमंत्री हर नाकामी पर अफसरों की ढाल बनेंगे, तो उसका पूरा राजनीतिक नुकसान भी उन्हीं को भुगतना पड़ेगा। जनता ने मुख्यमंत्री चुना है, लंबित फाइलों की रखवाली करने वाला संरक्षक नहीं।
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