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Ranchi : शनिवार की सुहानी दोपहर और मोरहाबादी के विशाल मैदान में पसरी हल्की धूप। चारों तरफ से आती पारंपरिक पकवानों की सौंधी खुशबू और खिलखिलाते बच्चों की आवाजें। तीसरे दिन जेसोवा मेले का नजारा कुछ ऐसा था मानो पूरा रांची शहर अपने घरों से निकलकर यहीं खिंचा चला आया हो। दिन में जहां परिवारों ने सुकून भरी चहलकदमी के साथ मेले का आनंद लिया, वहीं शाम ढलते ही पूरा मैदान रंग-बिरंगी लाइटों से इस कदर जगमगा उठा जैसे जमीन पर हजारों जुगनू एक साथ उतर आए हों। मौसम का मिजाज बदलते ही लोगों का उत्साह दोगुना हो गया और मैदान में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। अब यह सिर्फ खरीदारी का बाजार नहीं रहा, बल्कि राजधानी का सबसे बड़ा त्योहारी ठिकाना बन चुका है।
एक ही छत के नीचे सिमटी दिवाली की रौनक और परंपरा का स्वाद
दिवाली सिर पर है और ऐसे में मेले में खरीदारी का खुमार अपने चरम पर दिखा। मिट्टी के खूबसूरत दीये, हाथ से बने बंदनवार, डिजाइनर तोरण और सतरंगी रंगोली के स्टॉलों पर महिलाओं की अच्छी-खासी भीड़ जुटी रही। त्योहार के लिए पारंपरिक परिधानों और मैचिंग ज्वेलरी की खरीदारी में लोगों ने जमकर दिलचस्पी दिखाई। वहीं, खरीदारी की थकान मिटाने के लिए तैयार किए गए फूड जोन में जबरदस्त चहल-पहल रही। यहां झारखंड के पारंपरिक खान-पान का असली स्वाद परोसा जा रहा था। गर्मागर्म लिट्टी-चोखा, सोंधा धुस्का और पारंपरिक पिट्ठा की खुशबू ने पूरे माहौल को महका दिया। जायके के शौकीन लोग अपनी बारी के इंतजार में कतारों में खड़े होकर इन देशी व्यंजनों का लुत्फ उठाते नजर आए।
सेहत का सुरक्षा कवच और सामाजिक सरोकार की अनूठी पहल
रंग-बिरंगी दुकानों और खान-पान के बीच मेले ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के स्टॉल पर दिनभर बुजुर्गों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की आवाजाही लगी रही। यहां सत्तर वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए निशुल्क वय वंदना कार्ड बनाने का विशेष अभियान चलाया गया, जिसके लिए बुजुर्ग अपने पहचान पत्र के साथ पहुंचे। इसके साथ ही दिन-रात समाज की सेवा में जुटी रहने वाली आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और सहिया दीदियों के लिए मौके पर ही निशुल्क आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा दी गई। मेले की सैर करने आए कई परिवारों ने इस मौके का फायदा उठाया और बुजुर्गों का कार्ड बनवाकर इसे इस दीवाली का सबसे बड़ा उपहार बताया।
मंच पर थिरके नन्हे कदम, रैंप पर बिखरा मां और बच्चों का प्यार
जैसे-जैसे दिन ढला, मेले का सांस्कृतिक मंच उत्साह के नए रंगों में रंग गया। दोपहर में जब मॉम एंड बेबी शो का आयोजन हुआ, तो माताओं ने अपने छोटे बच्चों के साथ रैंप पर कदम ताल मिलाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। नन्हे-मुन्ने बच्चों की मासूमियत और उनके परिधानों ने पूरे माहौल में मिठास घोल दी। शाम पांच बजते ही मंच पर नन्हे कलाकारों ने विभिन्न नृत्यों की ऐसी ऊर्जावान प्रस्तुतियां दीं कि दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। पारंपरिक लोक धुनों पर हुई प्रस्तुतियों, विशेषकर पारंपरिक घोड़ा नृत्य और चादर बदल की अनोखी प्रस्तुति ने मेले की शाम को यादगार बना दिया। लोग देर रात तक संगीत की थाप और मेले की जगमगाहट के बीच झूमते रहे।
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