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Godda : झारखंड के गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी इलाके में एक नई सुबह की आहट सुनाई दे रही है। जिन हाथों में कभी सिर्फ अनिश्चित भविष्य की चिंता थी, आज उन हाथों में हुनर और कामयाबी की नई चाबी आ गई है। जितपुर खनन परियोजना की एक अनूठी पहल ने क्षेत्र के तीन होनहार युवाओं के सपनों को पंख लगा दिए हैं। NAPS यानी राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के तहत पहाड़पुर और जितपुर गांव के तीन बेटों का चयन तीन साल के मेकाट्रॉनिक्स डिप्लोमा के लिए हुआ है। अब ये तीनों युवा देश के प्रतिष्ठित टाटा मोटर्स संस्थान में आधुनिक तकनीक का पाठ पढ़ेंगे और सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग के साथ ही उन्हें हर महीने छात्रवृत्ति भी मिलेगी, जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।
मेहनत, उम्मीद और कामयाबी की कहानी
चुने गए युवाओं में पहाड़पुर गांव के रहने वाले अंकित हेंब्रम (पिता- बाबूराम हेंब्रम) और सिकंदर मरांडी (पिता- शांझला मरांडी) के साथ जितपुर गांव के भगत मुर्मू (पिता- भैया मुर्मू) शामिल हैं। ये तीनों ही युवा परियोजना से प्रभावित परिवारों से आते हैं, जिनके पास प्रतिभा तो थी लेकिन सही राह की कमी थी। टाटा मोटर्स में मेकाट्रॉनिक्स की ट्रेनिंग मिलने के बाद इनके लिए ऑटोमोबाइल और विनिर्माण के क्षेत्र में तरक्की के अनगिनत दरवाजे खुल जाएंगे। यह सफलता न केवल इन युवाओं का जीवन बदलेगी, बल्कि इनके पूरे परिवार और गांव के लिए भी एक नई उम्मीद लेकर आई है।
अंधेरे से उजाले तक… गाइडेंस और मेंटरिंग का कमाल
सपनों को सच करने का यह सफर इतना आसान नहीं था, लेकिन जितपुर खनन परियोजना की सीएसआर टीम ने एक मजबूत पुल का काम किया। परियोजना प्रमुख रितेश तिवारी के मार्गदर्शन में टीम ने सबसे पहले गांव-गांव जाकर प्रतिभावान युवाओं की पहचान की और उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा दिया। इसके बाद सीएसआर विभाग की सरबजीत कौर ने व्यक्तिगत स्तर पर युवाओं की काउंसिलिंग की, उन्हें प्रवेश परीक्षा की बारीकियां समझाईं और उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया। उसी लगातार मार्गदर्शन और मेहनत का नतीजा है कि आज इन तीनों बेटों ने इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में अपनी जगह बना ली है।
तकनीकी हुनर से मजबूत होगा कल
तीन साल का यह मेकाट्रॉनिक्स डिप्लोमा पूरी तरह से आधुनिक उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें युवाओं को मेकाट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और मशीनों से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। जब ये युवा अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी कर लेंगे, तो देश की अग्रणी ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में इनके लिए रोजगार के शानदार अवसर तैयार रहेंगे। इससे न केवल इनका करियर सुरक्षित होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव आएगा।
बदलाव की बयार… हुनर के साथ गांव का सर्वांगीण विकास
जितपुर खनन परियोजना का मकसद केवल नौकरी या ट्रेनिंग देना भर नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के जीवन स्तर को उठाना है। परियोजना की ओर से स्थानीय स्कूलों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने, बच्चों को बेहतर शिक्षा सामग्री देने, गांवों में साफ पीने के पानी की व्यवस्था करने और स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने जैसे कई सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन कोशिशों का एक ही मकसद है कि परियोजना प्रभावित गांवों का हर परिवार समाज की मुख्यधारा से जुड़े और एक समृद्ध भविष्य की ओर कदम बढ़ाए।
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