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Home » भूमिहीन स्कूलों को अब जमीन की टेंशन नहीं, मंत्री बोले- प्राथमिकता से मिलेगी जमीन
बिहार

भूमिहीन स्कूलों को अब जमीन की टेंशन नहीं, मंत्री बोले- प्राथमिकता से मिलेगी जमीन

August 10, 2026No Comments4 Mins Read
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Patna : बिहार में जमीन के अभाव में चल रहे स्कूलों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने ऐसे भूमिहीन स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराने का फैसला किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि जिन स्कूलों के पास अपनी जमीन नहीं है, उन्हें जमीन दिलाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। पिछले दो महीने में ही राज्य में 24 केंद्रीय विद्यालयों के लिए अधिकतम पांच एकड़ तक जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है।

अधिवेशन भवन में चल रहे राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन सोमवार को राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल शिक्षा अधिकारियों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने स्कूलों के लिए जमीन, अतिक्रमण, पहुंच पथ और अधिकारियों की कार्यशैली से जुड़े कई मुद्दों पर बात की। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे।

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स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण तो हटेगा, पहुंच पथ के लिए भी मिलेगी जमीन

डॉ. जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग को ऐसे विद्यालयों की सूची मिली है, जहां स्कूल की जमीन पर अतिक्रमण है। ऐसे स्कूलों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि केवल स्कूल की जमीन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों और शिक्षकों को स्कूल तक पहुंचने के लिए रास्ता भी जरूरी है। इसलिए जहां जरूरत होगी, वहां विद्यालयों तक पहुंच पथ के लिए भी जमीन उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग से जुड़े जमीन के मामलों को तेजी से निपटाने के लिए हर जिले में अलग से नोडल अधिकारी की तैनाती की जाएगी। इसके लिए डीसीएलआर या एडीएम स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे स्कूलों की जमीन से जुड़े मामलों में विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और फाइलों के निपटारे में अनावश्यक देरी नहीं होगी।

राजस्व मंत्री ने बताया कि पिछले दो महीने में 24 केंद्रीय विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है। प्रत्येक विद्यालय के लिए अधिकतम पांच एकड़ तक भूमि दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि सरकारी स्कूलों और खेल मैदानों की जमीन पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

महीने में एक दिन स्कूल जाएं अधिकारी, बच्चों से करें सीधा संवाद

डॉ. जायसवाल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सिर्फ कार्यालयों तक सीमित नहीं रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव से लेकर डीईओ, आरडीडी और डीपीओ स्तर के अधिकारी महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जरूर जाएं। वहां बच्चों से बातचीत करें और संभव हो तो खुद कक्षा भी लें।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों के स्कूल जाने से उन्हें कागजों पर लिखी रिपोर्ट के बजाय जमीन पर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी। बच्चों से सीधे बातचीत करने पर उनकी समस्याएं, स्कूल में पढ़ाई का माहौल और शिक्षकों के सामने आने वाली दिक्कतों की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी।

राजस्व मंत्री ने शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को तैयार करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की पहल से शिक्षकों की समस्याओं को एक-एक कर दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में शिक्षकों को भी शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

काम का दबाव हावी न होने दें, हर दिन के काम की करें समीक्षा

डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को काम के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिकारी कलम और दिमाग से काम करते हैं, इसलिए मानसिक तनाव को कम रखना जरूरी है। दिनभर में कई लोगों से मिलने वाले अधिकारियों को हर व्यक्ति से मुस्कान और नई ऊर्जा के साथ मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी के काम का असली मूल्यांकन उसके परिणाम से होना चाहिए। हर व्यक्ति को रात में सोने से पहले पूरे दिन किए गए काम की समीक्षा करनी चाहिए और अगले दिन क्या करना है, इसकी योजना बनानी चाहिए। इससे काम में सुधार आएगा और समय का बेहतर इस्तेमाल भी होगा।

राजस्व मंत्री ने कहा कि समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि अधिकारी और शिक्षक अपने काम की समीक्षा कर सकें। इससे यह पता चलता रहेगा कि शिक्षा व्यवस्था में कहां सुधार हुआ है और किन क्षेत्रों में अभी और काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर स्वागत किया। कार्यशाला में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ स्कूलों से जुड़े जमीन के मामलों को तेजी से निपटाने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया।

इसे भी पढ़ें : बिहार की कमाई ने पकड़ी रफ्तार, जुलाई तक ₹19253 करोड़ राजस्व संग्रह

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