Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Wednesday, 7 October, 2026 • 11:52 pm
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » “बाबा के बाद मां की छांव भी छिनी”, छलका बिलखते सीएम बेटे का दर्द
Headlines

“बाबा के बाद मां की छांव भी छिनी”, छलका बिलखते सीएम बेटे का दर्द

October 7, 2026No Comments4 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

auto

Ranchi : “बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गईं। मां….” बुधवार की रात जब सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर यह चंद शब्द लिखे, तो उसमें सूबे के मुखिया का कोई रुतबा नहीं था। वहां सिर्फ एक ऐसा बेटा खड़ा था जिसके सिर से जिंदगी की सबसे ठंडी और सबसे महफूज छत अचानक छिन गई थी। रांची के हिल व्यू अस्पताल के आईसीयू के बाहर खड़े हेमंत सोरेन की आंखें जब नम हुईं, तो पूरे राज्य का दिल भर आया। दिल और दिमाग की गंभीर बीमारियों से लड़ते हुए मां रूपी सोरेन ने वेंटिलेटर पर अपनी आखिरी सांस ली। इसके साथ ही एक भरा-पूरा दौर खामोश हो गया और बेटे के हिस्से में रह गया बस एक अंतहीन सन्नाटा।

बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं। आज वह छाँव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं।

माँ….

— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) October 7, 2026

Advertisement

दोपहर की बेचैनी, डॉक्टरों की मशक्कत और बेबस खड़ा बेटा

बीते कुछ दिन परिवार के लिए किसी भारी इम्तिहान से कम नहीं थे। मां को बचाने की आस में हाल ही में हैदराबाद ले जाया गया था। वहां से जब वे रांची लौटीं, तो लगा शायद सब ठीक हो जाएगा। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक सांसें उखड़ने लगीं और उन्हें फौरन अस्पताल में वेंटिलेटर पर ले जाना पड़ा। बुधवार दोपहर से ही सीएम हेमंत सोरेन अस्पताल के गलियारे में बेचैन कदमों से टहलते रहे। वे डॉक्टरों के हर चेहरे को उम्मीद से देखते, हर धड़कन पर दुआ मांगते रहे। लेकिन शाम होते-होते मॉनिटर की लकीरें सीधी हो गईं। सारी दवाएं, सारी दुआएं हार गईं और जिंदगी की डोर हमेशा के लिए टूट गई।

जब जंगल में गुरुजी लड़ते थे, तब फटे आंचल में उम्मीद पालती थी मां

रूपी सोरेन का जाना केवल एक बुजुर्ग महिला का दुनिया छोड़ना नहीं है। वे उस तपस्या की धुरी थीं, जिसे आज इतिहास कहा जाता है। जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड के हक के लिए घर-बार छोड़कर घने जंगलों, बीहड़ों और पहाड़ों की खाक छान रहे थे, तब घर के चौखट पर रूपी सोरेन अकेली खड़ी थीं। कभी घर में दाना नहीं होता था, कभी आधी रात को पुलिस की बूटों की आवाजें दहलीज को कंपा देती थीं। बच्चों को सीने से चिपकाए उस मां ने न जाने कितनी रातें जागकर काटी थीं। उन्होंने कभी कोई नारा नहीं लगाया, मंचों पर कभी भाषण नहीं दिए, लेकिन गुरुजी की हर लड़ाई के पीछे उनकी ही मूक साधना थी। बाबा के गुजर जाने के बाद वे ही हेमंत के लिए घर का मंदिर थीं, जहां लौटकर वे हर थकान भूल जाया करते थे।

व्हीलचेयर पर थमी वो कांपती हथेलियां, जिनमें पूरी जिंदगी का संघर्ष था

अभी तीन महीने ही तो गुजरे हैं, जब दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल ने एक बेहद भावुक दृश्य देखा था। स्वर्गीय शिबू सोरेन को मरणोपरांत मिले पद्म भूषण को अपने हाथों में थामने जब रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर पहुंची थीं, तो सारा देश उन्हें एकटक देख रहा था। कांपते हाथ, झुकी हुई कमर और चेहरे पर उम्र भर के संघर्ष की गहरी लकीरें। जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झुककर उनके हाथों में पदक सौंपा था, तब उनकी बूढ़ी आंखों में आंसुओं के साथ एक चमक थी, मानो कह रही हों कि गुरुजी, आपकी तपस्या आज मुकम्मल हो गई। किसे पता था कि जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर मिला वह सम्मान विदाई का पैगाम बनकर आया था।

सूनी हो गई दहलीज, आंसुओं में डूबा बेटा और यादों का कारवां

मां के जाने की खबर जैसे ही फैली, सत्ता और सियासत की सारी दीवारें ढह गईं। अस्पताल से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक हर आंख में आंसू थे। विरोधी हों या अपने, सब इस बात को महसूस कर रहे थे कि मां का जाना क्या होता है। पिता के बाद अब मां के साए से भी महरूम हो चुके हेमंत सोरेन आज उस खाली घर की दहलीज पर खड़े हैं, जहां अब कोई यह पूछने वाला नहीं बचा कि बेटा, खाना खाया या नहीं। वह ममता की छांव, जिसने आधी सदी तक आंधियों और तूफानों को अपने आंचल पर झेला, आज हमेशा के लिए प्रकृति की गोद में सो गई है। पीछे छूट गया है सिर्फ एक शब्द, मां…

इसे भी पढ़ें : सीएम हेमंत के सिर से उठा मां का साया, नहीं रहीं आंदोलन की तपिश झेलने वाली रूपी सोरेन

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous Articleसीएम हेमंत के सिर से उठा मां का साया, नहीं रहीं आंदोलन की तपिश झेलने वाली रूपी सोरेन
Next Article आंदोलन के अंगारों पर आंचल बिछाने वाली ‘मां’ अब सदा के लिये शांत

Related Posts

Headlines

आंदोलन के अंगारों पर आंचल बिछाने वाली ‘मां’ अब सदा के लिये शांत

October 7, 2026
Headlines

सीएम हेमंत के सिर से उठा मां का साया, नहीं रहीं आंदोलन की तपिश झेलने वाली रूपी सोरेन

October 7, 2026
Headlines

बिहार में रूफटॉप सोलर लगाने वालों की बल्ले-बल्ले, बची बिजली खरीदेगी सम्राट सरकार

October 7, 2026
Advertisement
Advertisement
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

आंदोलन के अंगारों पर आंचल बिछाने वाली ‘मां’ अब सदा के लिये शांत

October 7, 2026

“बाबा के बाद मां की छांव भी छिनी”, छलका बिलखते सीएम बेटे का दर्द

October 7, 2026

सीएम हेमंत के सिर से उठा मां का साया, नहीं रहीं आंदोलन की तपिश झेलने वाली रूपी सोरेन

October 7, 2026

बिहार में रूफटॉप सोलर लगाने वालों की बल्ले-बल्ले, बची बिजली खरीदेगी सम्राट सरकार

October 7, 2026

दिल्ली में बड़ा हादसा, सीमापुरी में चार मंजिला इमारत ढही; बच्चे समेत 7 घायल, रेस्क्यू जारी

October 7, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.