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Pawan Thakur
देश के किसी छोटे जिले या कस्बे में टेबल लैंप की मद्धिम रोशनी में बैठकर देर रात तक पढ़ाई करने वाले छात्र के मन में अक्सर एक ही टीस उठती है। वह सोचता है कि क्या उसकी लगन और मेहनत, बड़े महानगरों के वातानुकूलित कोचिंग सेंटरों में लाखों रुपये खर्च करने वाले छात्रों की बराबरी कर पाएगी? शिक्षा के बाजार ने काबिलियत से ज्यादा जेब के वजन को सफलता का पैमाना बना दिया था। मगर अब इसी असमानता को खत्म करने और ज्ञान के रास्ते से आर्थिक लाचारी की दीवार गिराने के लिए एक बड़ी डिजिटल क्रांति जमीन पर उतर चुकी है। गाजियाबाद और विशाखापट्टनम में सफल प्रयोग के बाद ‘येलोडॉट्स’ टैलेंट डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरे देश के युवाओं के लिए खोल दिया गया है। गांधी जयंती के पावन अवसर पर शुरू की गई यह मुहिम उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है, जहां बच्चों की आंखों में सपने तो बड़े हैं लेकिन जेब में कोचिंग की भारी-भरकम फीस भरने का सामर्थ्य नहीं है।
यह पूरी कवायद बीते 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के सामने रखे गए उस व्यापक विजन को हकीकत में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिसमें देश के एक करोड़ युवाओं को आधुनिक एआई तकनीकों से जोड़ने और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए घर-घर मुफ्त कोचिंग पहुंचाने का संकल्प लिया गया था।

एक ही मंच पर कोचिंग, पर्सनल ट्यूटर और आईआईटी की डिग्री
येलोडॉट्स केवल एक औपचारिक वेबसाइट या सामान्य ऑनलाइन क्लास नहीं है, बल्कि यह देश के शिक्षा तंत्र की जड़ों में बदलाव लाने वाला एक मुकम्मल प्लेटफॉर्म है। इस मंच पर एक साथ तीन बड़ी सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त दी जा रही हैं। पहली सुविधा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी है। इसके तहत करियर लॉन्चर का करीब तीन दशक का अनुभव और उनका व्यवस्थित स्टडी मटीरियल अब हर आम छात्र के लिए बिना किसी शुल्क के उपलब्ध करा दिया गया है। छात्र चाहे किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, उन्हें अब महंगे नोट्स या टेस्ट सीरीज खरीदने की मजबूरी नहीं रहेगी।
दूसरी और सबसे क्रांतिकारी सुविधा है एक व्यक्तिगत एआई ट्यूटर। आईआईटी खड़गपुर और फर्मी एआई ने नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के सहयोग से एक ऐसा डिजिटल शिक्षक तैयार किया है जो चौबीसों घंटे छात्र के साथ रहेगा। अक्सर बड़े कोचिंग संस्थानों की भीड़ भरी कक्षाओं में शर्मीले या औसत छात्र अपने मन की शंकाएं पूछने से हिचकते हैं। यह एआई ट्यूटर उसी कमजोरी को दूर करता है। यह हर छात्र की सीखने की गति, उसकी समझ के स्तर और उसकी भाषा के अनुसार खुद को ढाल लेता है। छात्र जब तक किसी बुनियादी नियम या सवाल को समझ नहीं लेता, यह ट्यूटर धैर्यपूर्वक आसान उदाहरणों के साथ उसे सिखाता रहता है।
तीसरी सबसे बड़ी सुविधा है आईआईटी खड़गपुर द्वारा तैयार किया गया एआई प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेट। आज के दौर में हर उद्योग और दफ्तर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ जरूरी होती जा रही है। आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों ने इस पाठ्यक्रम को इस तरह से तैयार किया है कि यह केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं की कसौटी पर भी खरा उतरे। इस सर्टिफिकेट के जरिए छोटे शहरों के युवाओं को सीधे नौकरी के बाजार में मजबूत पहचान और भरोसा हासिल होगा।

जहां रहते हैं, वहीं से तय होगी तरक्की की दिशा
इस पूरी पहल के पीछे सबसे बड़ा विचार यह है कि किसी नौजवान की कामयाबी की सीमा उसके शहर के भूगोल या उसके व्यक्तिगत संपर्कों के दायरे से तय नहीं होनी चाहिए। अक्सर गांव-देहात के प्रतिभाशाली युवाओं को यह पता ही नहीं चल पाता कि दुनिया में उनके हुनर की मांग कहां है। येलोडॉट्स का लक्ष्य उन सभी युवाओं को सीधे उन बड़े संस्थानों और कंपनियों से जोड़ना है जो योग्य कर्मचारियों की तलाश कर रहे हैं।
इस पहल को तैयार करने में मायसाथी फाउंडेशन, करियर लॉन्चर, आईआईटी खड़गपुर, हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन और नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया जैसी संस्थाएं एकजुट हुई हैं, जबकि एकस्टेप फाउंडेशन इसे मार्गदर्शन और दिशा दे रहा है। आने वाले समय में इसे जिला स्तर पर स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अंतिम छोर पर खड़ा छात्र भी इससे अछूता न रहे।
आधार और यूपीआई के बाद अब टैलेंट की बारी
इस पूरी व्यवस्था को देश में तकनीक के जरिए आई पिछली क्रांतियों की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। जिस तरह डिजिटल पहचान और डिजिटल भुगतान ने भारत की तस्वीर बदली, उसी तरह अब टैलेंट और हुनर को आम जनता के लिए सहज बनाने की तैयारी है।

स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाओं के लिए भी खुला मंच
यह व्यवस्था केवल व्यक्तिगत छात्रों तक ही सीमित नहीं है। देश भर के स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सीएसआर कार्यक्रम और सामाजिक संगठन भी अपने विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए इस पूरे तंत्र का सहारा ले सकते हैं। जो भी गैर-सरकारी संस्थाएं या शिक्षण संस्थान अपने स्तर पर युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार से जोड़ना चाहते हैं, वे सीधे इस सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग अपने विद्यार्थियों के लिए कर सकते हैं। कोई भी इच्छुक छात्र या संस्थान सीधे yellowdots.ai पर जाकर इस नई व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है और अपने सुनहरे कल की बुनियाद रख सकता है।
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