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Patna : बिहार पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन सभागार में मंगलवार, 6 अक्टूबर को जेंडर रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग विषय पर एक दिवसीय क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस पदाधिकारियों को महिलाओं, बालिकाओं और ट्रांसजेंडर से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने और शिकायतों पर प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया देने के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान पुलिसिंग में लैंगिक संवेदनशीलता को मजबूत करने और जेंडर आधारित मामलों को समझदारी के साथ संभालने पर विशेष जोर रहा।
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का उद्घाटन अपर पुलिस महानिदेशक कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग बिहार, पटना श्रीमती के. सुहिता अनुपम ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर UNFPA बिहार के राज्य कार्यालय प्रमुख श्री ख्वाजा सादत नूर, पुलिस अधीक्षक कमजोर वर्ग श्रीमती गरिमा, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की जेंडर रिसोर्स सेंटर की निदेशक डॉ. आयुषी दुबे, सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित जैन और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की अधिवक्ता सुश्री अंचल गुप्ता सहित कई अतिथि और पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस अधीक्षक कमजोर वर्ग श्रीमती गरिमा के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद मुख्य अतिथि श्रीमती के. सुहिता अनुपम ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात को ध्यान से सुनना, निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करना और पीड़ित की स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों से जेंडर से जुड़े मामलों में संवेदनशील और पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
कानून, पुलिस की भूमिका और व्यवहार पर प्रशिक्षण
कार्यक्रम को UNFPA बिहार के राज्य कार्यालय प्रमुख श्री ख्वाजा सादत नूर और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पटना के सहायक प्राध्यापक डॉ. अमित जैन ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने जेंडर आधारित हिंसा और भेदभाव से जुड़े मामलों पर चर्चा करते हुए बताया कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए पुलिस व्यवस्था में संवेदनशीलता को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी के साथ पुलिसकर्मियों का व्यवहार भी शिकायतकर्ता के लिए भरोसे का माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अमित जैन, श्री अंकित मैकवान और सुश्री अंचल गुप्ता ने अलग-अलग विषयों पर जानकारी दी। सत्रों में जेंडर संवेदनशील पुलिसिंग, महिलाओं से जुड़े कानून और प्रक्रियाएं, पुलिस की जिम्मेदारी तथा शिकायतों और मामलों पर संवेदनशील एवं प्रभावी प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षण में पुलिस पदाधिकारियों को वास्तविक परिस्थितियों में मामलों को संभालने के तरीकों की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।
सभी जिलों के महिला थानों के अधिकारी हुए शामिल
इस कार्यक्रम में बिहार के सभी जिलों के महिला थानों के थानाध्यक्ष और प्रत्येक जिले से एक महिला पुलिस पदाधिकारी ने हिस्सा लिया। इसका मकसद राज्य के अलग-अलग जिलों में तैनात पुलिस अधिकारियों की जेंडर से जुड़े मामलों की समझ को बेहतर करना और महिलाओं, बालिकाओं तथा ट्रांसजेंडर से संबंधित शिकायतों में संवेदनशील तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस पदाधिकारियों ने अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने जेंडर रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग से जुड़े विषयों पर चर्चा की और प्रशिक्षण में मिली जानकारी को अपने-अपने जिलों में पुलिस कार्यप्रणाली में लागू करने की बात कही। अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के प्रशिक्षण से पुलिस और शिकायतकर्ताओं के बीच भरोसा बढ़ाने के साथ महिलाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों से जुड़े मामलों में बेहतर तरीके से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
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