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News Samvad : उत्तर बिहार के सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा और झंझारपुर में गिरते भू-जल स्तर के कारण गहराए पेयजल संकट से निपटने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने व्यापक कदम उठाए हैं। विभाग ने 528 नए चापाकल लगाने की योजना शुरू की है, जिसके लिए विशेष तकनीकी टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें फील्ड में कैंप कर जलापूर्ति की स्थिति पर नजर रख रही हैं।
जलापूर्ति योजनाओं में तेजी से सुधार
मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार से शुक्रवार के बीच 289 बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत कर उन्हें फिर से चालू किया गया है। इसके अलावा, 110 से अधिक चापाकलों की गहराई बढ़ाने के लिए संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। विभागीय मंत्री नीरज कुमार सिंह ने बताया कि भू-जल स्तर 20 फीट से नीचे जाने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्थाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलेवार राहत कार्यों का विवरण
- सीतामढ़ी : 58 जलापूर्ति योजनाओं और 76 चापाकलों की मरम्मत पूरी की गई है, जबकि 85 चापाकलों की गहराई बढ़ाई गई है। चार अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था से 80 पंचायतों को लाभ मिलेगा।
- झंझारपुर : 12 जलापूर्ति योजनाएं शुरू की गई हैं और 7 चापाकलों की गहराई बढ़ाई गई है, जिससे 18 पंचायतों को राहत मिलेगी।
- दरभंगा : 209 जलापूर्ति योजनाओं को चालू किया गया है और 10 चापाकलों में बदलाव किए गए हैं। 200 नए चापाकलों की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जबकि छह टैंकरों से 37 पंचायतें लाभान्वित होंगी।
- मधुबनी : 8 चापाकलों में बदलाव, 90 नए चापाकलों की स्वीकृति और दो टैंकरों की व्यवस्था से 44 पंचायतों को राहत मिलेगी।
जिला प्रशासन की सक्रियता
दरभंगा जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि पेयजल संकट वाले क्षेत्रों में टैंकरों, सिंटेक्स टंकियों और सबमर्सिबल पंपों के जरिए जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। यह पहल उत्तर बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की कमी को दूर करने के लिए अहम साबित हो रही है।
आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद
सरकार की सक्रियता और तकनीकी टीमों की तैनाती से जल संकट प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति जल्द ही सामान्य होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने सरकार के इन प्रयासों की सराहना की है और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को लेकर आशान्वित हैं।
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