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News Samvad : केरल के पथानामथिट्टा में पुलिस ने एक साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट को चलाने वाला कोई अपराधी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस का एक कांस्टेबल था। यह जवान प्रतापगढ़ के एसपी ऑफिस में कॉल सर्विलांस की जिम्मेदारी संभालता था और वहीं से लोगों का निजी डेटा चोरी कर रहा था।
मोबाइल नंबर और लोकेशन तक पहुंच
गिरोह ने ऑनलाइन टूल्स की मदद से गैर कानूनी तरीके से मोबाइल नंबर, लाइव लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड तक पहुंच बनाई। इस डेटा का इस्तेमाल करके उन्होंने लाखों रुपये की ठगी की। पुलिस अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पहली गिरफ्तारी से खुला पूरा नेटवर्क
सेंट्रल एजेंसियों से मिले इनपुट पर सबसे पहले कन्ननकोड के रहने वाले जोएल वी. जोस को पकड़ा गया। उसके फोन और लैपटॉप की जांच में पूरे नेटवर्क की जानकारियां मिलीं। इसी आधार पर पुलिस दूसरे आरोपियों तक पहुंची।
कई राज्यों से हुई गिरफ्तारियां
दूसरा आरोपी हीरल बेन अनुज पटेल को गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी प्रवीण कुमार उर्फ सोनू मेरठ का रहने वाला है। वह उसी कांस्टेबल से डेटा हासिल करता था जिसे कॉल सर्विलांस की जिम्मेदारी दी गई थी। चौथी आरोपी पलक सिंह वाराणसी से पकड़ी गई है।
दिल्ली से पकड़ा गया मुख्य साजिशकर्ता
डीसीआरबी DSP बीनू वर्गीस की देखरेख में बनी टीम ने प्रवीण कुमार की लोकेशन दिल्ली में ट्रेस की। इंस्पेक्टर सुनील कृष्णन और उनकी टीम ने उसे नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से हिरासत में लिया।
विदेशी कनेक्शन की जांच
जांच टीम को शक है कि यह गिरोह पाकिस्तान और इज़राइल में अपने संपर्कों को संवेदनशील जानकारी भेजता था। NIA और IB से मिली इनपुट्स के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। जिला पुलिस चीफ आर आनंद की देखरेख में एक स्पेशल टीम इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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