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Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची के लिए यह खबर सिर्फ एक सम्मान की नहीं, बल्कि उस संघर्ष, समर्पण और सेवा की कहानी है, जिसने एक साधारण डॉक्टर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। शहर के जाने-माने सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ दिनेश कुमार ठाकुर को जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिजियोथेरेपी सम्मेलन में न सिर्फ सम्मानित किया गया, बल्कि उन्हें चिकित्सा क्षेत्र का एक अहम चेहरा भी माना गया।
जयपुर में जुटे दुनिया भर के विशेषज्ञ
30 और 31 जनवरी 2026 को राजस्थान के जयपुर स्थित निम्स विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय फिजियोथेरेपी सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में भारत सहित कई देशों से फिजियोथेरेपी और चिकित्सा जगत के दिग्गज शामिल हुए। नए शोध, आधुनिक तकनीक और मरीजों के बेहतर इलाज पर गहन चर्चा हुई।

डॉ ठाकुर बने वैज्ञानिक सत्रों के अध्यक्ष
इस सम्मेलन में रांची से पहुंचे डॉ दिनेश कुमार ठाकुर की भूमिका बेहद खास रही। उनकी विशेषज्ञता और वर्षों के अनुभव को देखते हुए उन्हें कई Scientific Session का अध्यक्ष बनाया गया। मंच से उनके विचारों को सुनने के लिए देश-विदेश के डॉक्टर और शोधकर्ता मौजूद रहे।
सेवा को मिला सम्मान, मिला चिकित्सा वैभव अवॉर्ड
सम्मेलन के दौरान डॉ ठाकुर को चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चिकित्सा वैभव सम्मान से नवाजा गया। इसके साथ ही उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके वर्षों के मरीज-केंद्रित इलाज और फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का परिणाम है।

विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों ने किया सम्मानित
डॉ दिनेश कुमार ठाकुर को यह सम्मान निम्स विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट संतोष नायर, निबंधक डॉ संदीप त्रिपाठी, डीन एवं निदेशक डॉ हिमांशु त्रिपाठी और प्राचार्य प्रो. डॉ अजीत कुमार सहारन द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। मंच पर डॉ ठाकुर की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की प्रेरणा बताया गया।
रांची में रहकर देश-दुनिया में पहचान
डॉ ठाकुर वर्तमान में रांची के गुरुनानक अस्पताल और देबुका अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि महानगरों की बजाय रांची जैसे शहर में रहकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनके इलाज से हजारों मरीजों को नई जिंदगी और राहत मिली है।

मरीज पहले, नाम बाद में
डॉ दिनेश ठाकुर की पहचान सिर्फ एक अवॉर्ड विजेता डॉक्टर की नहीं, बल्कि एक ऐसे चिकित्सक की है जो मरीज को सबसे पहले रखता है। उनके सहयोगी बताते हैं कि वे इलाज को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि सेवा मानते हैं। शायद यही वजह है कि उनकी मेहनत आज वैश्विक मंच पर पहचानी गई। अंतरराष्ट्रीय मंच पर रांची और झारखंड का नाम रोशन होना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।
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