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Pakur (Jaydev Kumar) : झारखंड के सुदूर इलाके में बसा पाकुड़ जिला… जहां अक्सर सीमित संसाधन और चुनौतियां विकास की रफ्तार को धीमा कर देती हैं… अब पूरे देश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। नीति आयोग की प्रतिष्ठित “Use Case for NITI for State” प्रतियोगिता में पाकुड़ ने फाइनेंसियल इन्क्लूजन और स्किल डेवलपमेंट श्रेणी में देशभर में दूसरा स्थान हासिल कर यह साबित किया कि इच्छाशक्ति और टीमवर्क से कोई भी मंज़िल दूर नहीं।
LBSNAA में मिला सम्मान, गर्व से झुके सिर
09 अक्टूबर 2025 को मसूरी की ठंडी हवाओं में जब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के मंच पर पाकुड़ का नाम पुकारा गया, तो यह सिर्फ एक घोषणा नहीं थी — यह छोटे शहर की बड़ी उपलब्धि की कहानी थी। मंच पर उपायुक्त मनीष कुमार को सम्मानित किया गया, लेकिन उनके चेहरे पर झलकता गर्व पूरे जिले का था।
सीमित संसाधनों में हमने रचा कमाल : डीसी मनीष कुमार
सम्मान ग्रहण करने के बाद उपायुक्त ने कहा, “यह सिर्फ मेरी नहीं, पाकुड़ की पूरी टीम की सफलता है। जब संसाधन कम हों, तो नवाचार सबसे बड़ा हथियार होता है। हमने यही किया… हर पंचायत, हर गांव में टीमवर्क और लोगों की भागीदारी से काम किया।”
उनकी आवाज़ में आत्मविश्वास और विनम्रता दोनों झलक रही थी… जैसे कोई कप्तान अपने पूरे दल को श्रेय दे रहा हो।
पाकुड़ बना प्रेरणा का जिला
वित्तीय समावेशन के तहत बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को जोड़ना, महिलाओं को स्वरोजगार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सशक्त बनाना, और युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट मिशन चलाना- ये सब मिलकर पाकुड़ को एक मॉडल डिस्ट्रिक्ट बना चुके हैं।
अब देशभर के जिलों में इस मॉडल को अपनाने की चर्चा है। यह सिर्फ विकास की कहानी नहीं, बल्कि भरोसे, मेहनत और बदलाव की मिसाल है।
“हर सफलता के पीछे एक सामूहिक ताकत”
डीसी मनीष कुमार ने जिले के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को धन्यवाद देते हुए कहा, “यह सम्मान हर उस व्यक्ति का है जिसने कभी कहा- हम कर सकते हैं!”

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