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Lohardaga (Gautam Lenin) : लोहरदगा की बारिश भरी एक सर्द रात… सदर अस्पताल में भर्ती प्रसूता यानी गर्भवती महिला को डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर किया था। लेकिन सहारा बनने वाली सहिया ही मौत का सौदागर बन बैठी। इल्जाम है कि आधी रात को सहिया ने प्रसूता और उसके पति को डरा और बहलाकर निजी अस्पताल पहुंचाया गया। वहां न डॉक्टर मौजूद थे, न सही व्यवस्था। नतीजा… जन्म लेते ही नवजात ने दम तोड़ दिया। परिजनों से 35 हजार रुपये वसूलने के बाद महिला को फिर से सदर अस्पताल वापस भेज दिया गया। सहिया वह महिला होती है जिसे सरकार ने गर्भवती महिलाओं का सहारा बनने की जिम्मेदारी दी थी।
35 हजार की लगी बोली और छिन गई मासूम जिंदगी
निजी अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे, बस नर्सिंग स्टाफ ने जल्दबाजी में डिलीवरी करा दी। मां की आंखों में उम्मीद थी, परिवार के चेहरे पर राहत की आहट… लेकिन अगले ही पल सब खत्म हो गया। शिशु ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया। अस्पताल ने इस त्रासदी के बावजूद परिजनों से मोटी रकम करीब 35 हजार रुपये वसूल लिए। जिंदगी और मौत के इस खेल में पैसों का हिसाब तो पूरा हुआ, लेकिन एक मासूम की सांसें हमेशा के लिए रुक गईं।
लोहरदगा सदर अस्पताल से आधी रात रेफर गर्भवती महिला को उठा सहिया ले गई निजी अस्पताल, मोटी रमक वसूल करायी डिलिवरी, नवजात की मौत के बाद वापस सदर अस्पताल में किया भर्ती। क्या बोली पीड़ित महिला निशा, उसके पति विजय और सिविल सर्जन डॉ राजू कच्छप… देखें pic.twitter.com/4syyeH3vGS
— News Samvad (@newssamvaad) September 27, 2025
सरकारी व्यवस्था पर भारी पड़ते दलाल
यह पहला मामला नहीं है। लोहरदगा में पहले भी कई बार दलालों और सहिया के जरिए रेफर मरीजों को निजी अस्पतालों में खींच ले जाने का खेल सामने आया है। सवाल उठता है कि आखिर क्यों सरकार की आंखों के सामने ऐसे खेल होते हैं? सहिया, जो मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए नियुक्त हैं, निजी अस्पतालों के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं।
सिविल सर्जन की चेतावनी – “दलाली नहीं बर्दाश्त”
इस घटना के बाद सिविल सर्जन डॉ. राजू कच्छप ने सख्त चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सदर अस्पताल में अब दलाली और मनमानी नहीं चलेगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है… क्या कार्रवाई इस गहरी साजिश को रोक पाएगी या फिर आने वाले दिनों में किसी और मासूम की सांसें इसी तरह रुक जाएंगी?
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