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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : झारखंड के मशहूर धार्मिक नगर रजरप्पा से निकली एक बेटी ने ऐसा काम कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में हो रही है। महज 21 साल की उम्र में श्रेया पंडा ने स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट SIENA तैयार कर तकनीक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनकी इस उपलब्धि पर रजरप्पा, रामगढ़ और पूरे पंडा समाज में खुशी का माहौल है। श्रेया की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े शहरों की जरूरत नहीं होती। अगर जुनून, मेहनत और परिवार का साथ हो तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।
मंदिर नगरी की बेटी बनी देश की पहचान
श्रेया पंडा मां छिन्नमस्तिका मंदिर के वरिष्ठ पुजारी और मंदिर न्यास समिति के सचिव शुभाशीष पंडा की बेटी हैं। धार्मिक माहौल में पली-बढ़ी श्रेया ने बचपन से ही पढ़ाई और तकनीक के क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई। परिवार ने भी उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए हर कदम पर उनका साथ दिया। आज जब उनकी बनाई तकनीक की चर्चा देशभर में हो रही है, तब रजरप्पा के लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालु भी इस बेटी की उपलब्धि की चर्चा कर रहे हैं।
मां-पिता के भरोसे ने दिए सपनों को पंख
श्रेया अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनकी मां जया पंडा गृहिणी हैं और उन्होंने हमेशा बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्रेया कहती हैं कि उनके माता-पिता ने कभी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वह बेटी हैं। उन्हें हमेशा अपने सपनों को पूरा करने की आजादी मिली। यही विश्वास आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
क्या है SIENA, जिसकी हो रही देशभर में चर्चा?
SIENA यानी Smart Interactive Educational Neural Assistant पूरी तरह भारत में विकसित किया गया ह्यूमनॉइड रोबोट है। इसे खास तौर पर शिक्षा के क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह रोबोट छात्रों को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों को प्रैक्टिकल तरीके से समझाने में मदद करता है। केवल किताबों तक सीमित रहने के बजाय बच्चे सीधे रोबोट के साथ बातचीत कर सीख सकते हैं। SIENA की खासियत यह है कि यह चेहरे पहचान सकता है, छात्रों की उपस्थिति दर्ज कर सकता है, कई भाषाओं में बातचीत कर सकता है और सवालों के जवाब भी दे सकता है।
एडवांस तकनीक से लैस है स्वदेशी रोबोट
SIENA में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें LiDAR नेविगेशन सिस्टम, वॉइस इंटरैक्शन, टच स्क्रीन, इंटेलिजेंट मेमोरी और स्मार्ट रिस्पॉन्स जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। शिक्षा संस्थानों के अलावा यह रोबोट रिसेप्शनिस्ट, सूचना सहायक और डिजिटल कैंपस प्रबंधन में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
छोटे शहरों की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
श्रेया की कहानी उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर बड़े सपने देखती हैं। उनका मानना है कि विज्ञान और तकनीक का क्षेत्र केवल बड़े शहरों या बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है। श्रेया कहती हैं, “अगर मेहनत करने का जज्बा हो तो किसी भी जगह से दुनिया बदलने वाला काम किया जा सकता है। लड़कियों को खुद पर भरोसा रखना चाहिए।”
ग्रामीण बेटियों के लिए नई पहल की तैयारी
श्रेया की कंपनी Paradox Innovator Pvt. Ltd. स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। कंपनी ICAR-NINFET जैसे संस्थानों के साथ भी जुड़ी हुई है। अब उनका अगला सपना ग्रामीण इलाकों की लड़कियों के लिए मुफ्त रोबोटिक्स लैब स्थापित करना है, ताकि गांवों की बेटियां भी आधुनिक तकनीक से जुड़ सकें और अपने सपनों को नई उड़ान दे सकें।
पंडा समाज में जश्न जैसा माहौल
श्रेया की इस उपलब्धि पर पंडा समाज के लोगों ने खुशी जताई है। समाज के लोगों का कहना है कि श्रेया ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और झारखंड का नाम रोशन किया है। रजरप्पा की यह बेटी आज इस बात का प्रतीक बन चुकी है कि प्रतिभा किसी पहचान या संसाधन की मोहताज नहीं होती। सही दिशा और मजबूत इरादों के साथ कोई भी युवा देश के लिए नई मिसाल कायम कर सकता है।
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