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Chattishgarh : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ इलाका… घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियां और दुर्गम रास्ते। यही वह जगह है जहां तीन दशकों से नक्सली संगठनों ने खून और खौफ का साम्राज्य खड़ा कर रखा था। सोमवार की सुबह इस जंगल ने गोलियों की गूंज सुनी। फायरिंग की इस गूंज ने लाल आतंक की रीढ़ तोड़ दी।
सुरक्षाबलों का ऑपरेशन और गोलियों की बरसात
पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन की अगुवाई में सुरक्षा बलों ने महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर सर्च ऑपरेशन चलाया। जानकारी थी कि इलाके में माओवादी गतिविधियां तेज हैं। जैसे ही बलों ने घेरा डाला, नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गोलियों की तड़तड़ाहट घंटों गूंजती रही। जब धुआं छंटा, जमीन पर नक्सल संगठन के दो सबसे बड़े कमांडर बेजान पड़े थे।
40-40 लाख के इनामी नक्सली
मारे गए नक्सलियों की पहचान सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति सदस्य राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कोसा दादा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी के रूप में हुई। दोनों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 40-40 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी सफलता थी।
30 साल का खूनी सफर
राजू दादा और कोसा दादा का नाम सुनते ही बस्तर अंचल के लोग दहशत में आ जाते थे। तीन दशकों तक ये दोनों माओवादी संगठन की रणनीति बनाने और खून-खराबे की घटनाओं को अंजाम देने में सक्रिय रहे। कई बार सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले, पुलिस जवानों की शहादत और निर्दोष ग्रामीणों की हत्या—इन सबके पीछे यही दिमाग थे।
एके-47, इंसास राइफल, बीजीएल लॉन्चर बरामद
मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास राइफल, बीजीएल लॉन्चर, भारी मात्रा में विस्फोटक और माओवादी साहित्य बरामद हुआ। यह साफ संकेत है कि संगठन बड़े हमले की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही सुरक्षा बलों की गोली ने उनकी योजना को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
आईजी सुंदरराज पी. ने इसे संगठन के लिए करारा झटका बताया
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने इसे संगठन के लिए करारा झटका बताया। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद सुरक्षा बल पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं। आईजी ने नक्सलियों से एक बार फिर हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की।
गृह मंत्री अमित शाह और सीएम का सख्त संदेश
गृह मंत्री अमित शाह ने इसे सुरक्षाबलों की बड़ी जीत करार देते हुए कहा कि नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व अब व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि मार्च 2026 तक भारत नक्सल मुक्त होगा। उन्होंने इस सफलता को निर्णायक पड़ाव बताया और कहा कि शांति व विकास की प्रक्रिया और गति पकड़ेगी।
जंगल से उम्मीद की किरण
अबूझमाड़ का यही इलाका जहां कभी गोलियों और बारूदी सुरंगों का आतंक था, वहां अब सुरक्षाबलों के साहस और रणनीति से शांति की किरण झलकने लगी है। यह मुठभेड़ केवल दो नक्सलियों की मौत नहीं, बल्कि उस अंधेरे पर चोट है जो 30 साल से इलाके को घेरकर बैठा था।
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