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Ranchi : झारखंड सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण को लेकर एक अहम पहल की है। CS यानी मुख्य सचिव अलका तिवारी ने निर्देश दिया है कि राज्यभर में ट्रांसजेंडरों का व्यापक सर्वे कराया जाए। इस सर्वे के जरिए जिलावार उनकी संख्या, जरूरतें और प्राथमिकताएं जानी जाएंगी। इसके बाद ही सरकार उनके हित में योजनाओं और फंड के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ पाएगी।
क्यों ज़रूरी है यह सर्वे
झारखंड में 2011 की जनगणना के अनुसार ट्रांसजेंडरों की संख्या 13,463 है। जबकि पूरे देश में यह संख्या 4,87,803 है। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे भिन्न हो सकती है। ट्रांसजेंडर अक्सर अपनी पहचान उजागर करने से हिचकिचाते हैं। इसी कारण उन्हें पहचान पत्र, आरक्षण, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, गरिमा गृह और अन्य सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। मुख्य सचिव ने इस चुनौती को स्वीकारते हुए उपायुक्तों की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समितियों के शीघ्र गठन पर बल दिया। इन समितियों का मकसद होगा – ट्रांसजेंडरों को बिना भेदभाव के सरकारी योजनाओं से जोड़ना।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
- राज्यव्यापी सर्वे : ट्रांसजेंडरों की सही संख्या और उनकी वास्तविक जरूरतों का आकलन।
- जिलास्तरीय समिति का गठन : पहचान संबंधी समस्याओं का समाधान और योजनाओं तक पहुंच आसान बनाना।
- ट्रांसजेंडर सपोर्ट यूनिट : यह नई यूनिट समुदाय की समस्याओं को सुनेगी, समाधान सुझाएगी और बोर्ड को अनुशंसाएं देगी।
- कल्याण योजनाओं से जोड़ना : पेंशन योजना, स्वास्थ्य बीमा (आयुष्मान कार्ड), गरिमा गृह जैसी सुविधाओं का लाभ दिलाना।
- भेदभाव से सुरक्षा : समाज में समान अवसर सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान।
बैठक में ये थे मौजूद
मुख्य सचिव अलका तिवारी की अध्यक्षता में हुई झारखंड ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की बैठक में गृह सचिव वंदना दादेल, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास सचिव मनोज कुमार, वित्त सचिव प्रशांत कुमार, ग्रामीण विकास सचिव के. श्रीनिवासन समेत कई वरीय अधिकारी शामिल हुए।
आगे की राह
यह सर्वे और समितियां ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं। अब तक हाशिए पर रहे इस वर्ग को योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा जब उनकी पहचान दर्ज होगी और उनकी जरूरतें नीतिगत स्तर पर समझी जाएंगी। झारखंड सरकार का यह कदम सिर्फ आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य है – ट्रांसजेंडरों को समान अधिकार, अवसर और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार दिलाना।
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