अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ने और कई इलाकों में कटाव की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। शुक्रवार को विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के सभी संवेदनशील इलाकों में चल रहे कटावरोधी और बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि बाढ़ के समय छोटी सी चूक भी बड़े नुकसान की वजह बन सकती है। इसलिए हर तटबंध, हर संवेदनशील गांव और हर नदी किनारे पर लगातार निगरानी रखी जाए। जहां भी जरूरत महसूस हो, वहां बिना देरी किए कार्रवाई की जाए। सचिव ने कहा कि बाढ़ संघर्ष सामग्री पहले से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे। किसी भी अधिकारी को मुख्यालय से सहयोग चाहिए तो तुरंत जानकारी दें, ताकि समय रहते हर जरूरी संसाधन उपलब्ध कराया जा सके।
एक-एक संवेदनशील इलाके की ली गई जानकारी
समीक्षा बैठक में मधेपुरा, भागलपुर, भोजपुर, सारण समेत कई जिलों के उन इलाकों पर खास फोकस रहा, जहां हर साल बाढ़ और कटाव की समस्या सामने आती है। अधिकारियों ने मौके पर चल रहे काम और मौजूदा स्थिति की जानकारी सचिव को दी। डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि केवल कागजों पर रिपोर्ट भेजना काफी नहीं है। अभियंता और अधिकारी खुद मौके पर जाएं, हालात का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाएं।
भोजपुर के जवइनियां में तेजी से चल रहा कटावरोधी काम
बैठक में भोजपुर जिले के जवइनियां क्षेत्र की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि बक्सर-कोईलवर गंगा तटबंध के सामने गंगापुर, भुसौला, नंदपुर और दामोदरपुर गांव के पास करीब 1200 मीटर लंबाई में कटाव रोकने का काम चल रहा है। अब तक करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बाकी हिस्सा भी तेजी से बनाया जा रहा है और 7 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग का कहना है कि बढ़ते जलस्तर का इस काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सोनपुर दियारा में राहत, लेकिन चौकसी जारी रखने का आदेश
सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के सबलपुर-पछियारी टोला इलाके में भी कटावरोधी कार्यों की समीक्षा की गई। पिछले साल यह इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया था। इस बार करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में सुरक्षा कार्य कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नदी तल की सुरक्षा का काम पूरा हो चुका है। किनारों के संवेदनशील हिस्से भी सुरक्षित कर दिए गए हैं। बाकी हिस्सों में एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा दी गई है। फिलहाल पूरा क्षेत्र सुरक्षित है, लेकिन सचिव ने स्पष्ट कहा कि निगरानी में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

भागलपुर के राघोपुर में दिन-रात काम कर रोका गया कटाव
भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड के काजीकोरैया-राघोपुर इलाके में गंगा नदी के कटाव को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने मौके पर कैंप लगाकर लगातार काम किया। इसका असर भी दिखा और कटाव पर नियंत्रण पा लिया गया। अब सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए 110 मीटर क्षेत्र में बालू से भरे बोरे, जियोबैग और अन्य जरूरी सामग्री जमा कर दी गई है। सचिव ने निर्देश दिया कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाए।

मधेपुरा में युद्धस्तर पर चल रहा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य
मधेपुरा जिले के आलमनगर प्रखंड के गंगापुर पंचायत स्थित लुटनाटोला के पास कोसी नदी के किनारे क्षरण की सूचना मिलते ही विभाग ने तेजी से काम शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि मौके पर 10 हजार से ज्यादा बालू भरे बोरे, नायलॉन क्रेट, बीए वायर क्रेट और बड़ी मात्रा में बांस पहुंचा दिए गए हैं। मशीनें लगातार काम कर रही हैं और पर्याप्त मजदूर भी लगाए गए हैं। पूरे इलाके की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।

संतनगर में फिलहाल खतरा नहीं, फिर भी अलर्ट रहने को कहा
भागलपुर के संतनगर गांव की स्थिति की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि गांव की बसावट गंगा नदी से करीब 100 मीटर दूर है। अभी कटाव जैसी कोई गंभीर स्थिति नहीं है। हालांकि जलस्तर में उतार-चढ़ाव की वजह से कुछ जगहों पर सतह का हल्का क्षरण हुआ है। इसे देखते हुए सचिव ने निर्देश दिया कि हालात पर लगातार नजर रखी जाए और जरूरत पड़ते ही बाढ़ संघर्षात्मक कार्य शुरू कर दिए जाएं।
सचिव बोले- लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
बैठक के आखिर में डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सभी मुख्य अभियंताओं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों का नियमित निरीक्षण जारी रखें। तटबंधों पर जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करें और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान लोगों की जान-माल की सुरक्षा विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को समय रहते राहत मिल सके।
इसे भी पढ़ें : CM सम्राट का ‘सहयोग शिविर’ : दो माह में 5.33 लाख मामलों का निपटारा, सचिव क्या बोले… जानें



