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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : जब आस्था का समंदर हिलोरें मारता है, तो तपती धूप और उमस भी हवा हो जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा गुरुवार को रामगढ़ के कैथा में देखने को मिला। मौका था आषाढ़ मास की प्रसिद्ध रथयात्रा का और जगह थी यहां का ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर। बरसों पुरानी परंपरा के मुताबिक, जब भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ नगर भ्रमण पर निकले, तो पूरा इलाका सिर्फ एक ही रंग में रंग गया… और वो था भक्ति का रंग।
हर साल की तरह इस बार भी कैथा में आस्था, श्रद्धा और उल्लास का ऐसा अनूठा संगम दिखा कि देखने वाले बस देखते रह गए। पंडितों के मंत्रोच्चार और शंख की ध्वनि के बीच हजारों भक्तों ने शीश नवाया और पुण्य लाभ कमाया।
जब कैथा हाई स्कूल से बढ़ा रथ, तो थम गईं सबकी निगाहें
इस पूरे उत्सव का सबसे भावुक और सुंदर पल वो था, जब कैथा हाई स्कूल परिसर से भगवान का भव्य रथ रवाना हुआ। रथ को फूलों और रंग-बिरंगे कपड़ों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। जैसे ही रथ के पहिए आगे बढ़े, वैसे ही ‘जय जगन्नाथ’ के गगनभेदी जयकारों से आसमान गूंज उठा।
भगवान के रथ की रस्सी को छूने और उसे खींचने के लिए भक्तों में होड़ सी मच गई। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या महिलाएं, हर कोई कंधे से कंधा मिलाकर, रस्सियां थामे पूरे उत्साह के साथ मंदिर की ओर कदम बढ़ा रहा था। ऐसा लग रहा था मानो पूरा रामगढ़ भगवान को अपने हाथों से उनके धाम ले जाने के लिए मचल उठा हो।

शंखनाद, मंजीरों की थाप और लोबान की खुशबू से महकी फिजा
रथयात्रा का रास्ता सिर्फ लोगों की भीड़ से नहीं, बल्कि एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा था। हवा में धूप और लोबान की मनमोहक खुशबू तैर रही थी। एक तरफ शंख और घंटियां बज रही थीं, तो दूसरी तरफ झाल-मंजीरों की थाप पर भक्त झूमते-गाते चल रहे थे। भजन-कीर्तन की मधुर धुनों ने रास्ते में खड़े लोगों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया। शाम होते-होते जब मंदिर परिसर आकर्षक लाइटों की रोशनी से नहा उठा, तो उसकी खूबसूरती देखने लायक थी।
रिश्तों की डोर और आस्था का मेल, दूर-दूर से पहुंचे परिवार
इस रथयात्रा की एक खूबसूरत तस्वीर यह भी थी कि यहां लोग अकेले नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ पहुंचे थे। रामगढ़ शहर के अलावा भुरकुंडा, पतरातू, गोला, कुजू और बरकाकाना जैसे दूर-दराज के इलाकों से भी लोग गाड़ियों में भरकर कैथा पहुंचे थे। किसी ने बच्चे को कंधे पर बैठा रखा था, तो कोई बुजुर्ग माता-पिता का हाथ थामे कतार में खड़ा था। सभी की आंखों में एक ही आस थी—प्रभु के दर्शन और परिवार की सुख-समृद्धि की मन्नत।
भीड़ इतनी थी कि पैर रखने की जगह नहीं थी, लेकिन मंदिर समिति के वालंटियर्स ने सुरक्षा, पीने के पानी और साफ-सफाई की ऐसी सुव्यवस्थित व्यवस्था की थी कि हर कोई आराम से दर्शन कर सका।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ रही है यह अटूट श्रद्धा
कैथा का यह ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि इस इलाके के लोगों की आत्मा से जुड़ा है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि वक्त बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन भगवान जगन्नाथ के प्रति कैथा और आसपास के लोगों का प्यार और विश्वास रत्ती भर भी कम नहीं हुआ। आज की नई पीढ़ी भी उसी जोश और नियम-धर्म के साथ इस रथयात्रा की परंपरा को आगे बढ़ा रही है, जो यह बताता है कि संस्कृति की जड़ें यहां आज भी कितनी मजबूत हैं।
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