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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिले के समाहरणालय सभागार में पीएम श्री स्कूलों की समीक्षा बैठक का माहौल बिल्कुल जीवंत था। दीप प्रज्वलित होते ही वहां मौजूद हर चेहरा उम्मीद और मेहनत की कहानी बयां कर रहा था। चेतना नंद सिंह, केंद्रीय नोडल अधिकारी और भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने जैसे ही बैठक शुरू की, वहां का माहौल गंभीर और उत्साहपूर्ण बन गया।
“हर बच्चे का हक़ है पढ़ाई का”
डीसी मनीष कुमार ने बैठक में बताते हुए कहा कि बच्चों की उपस्थिति और सहभागिता बढ़ रही है। माता-पिता का सहयोग धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। उन्होंने खास तौर पर यह बताया कि कई ऐसे बच्चे हैं जो पहले स्कूल छोड़ने के कगार पर थे, लेकिन अब टीचर्स और स्टाफ की मेहनत से वे नियमित पढ़ाई में शामिल हैं। “हम चाहते हैं कि कोई बच्चा भी घर के काम या खेल में व्यस्त होने के कारण स्कूल से बाहर न रहे,” उपायुक्त ने कहा। यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं थी, बल्कि हर बच्चे की कहानी और उसकी ज़िंदगी बदलने की कोशिश थी।
रसोइया दीदियों की मेहनत का जादू
बैठक में बच्चों के लिए पोषण और आहार कार्यक्रम की भी चर्चा हुई। रसोइया दीदियों ने बच्चों के लिए हर दिन स्वादिष्ट और संतुलित भोजन तैयार किया। उनका कहना था, “अगर बच्चों को अच्छा खाना मिलेगा, तो उनका मन पढ़ाई में लगेगा।” इस छोटे से प्रयास ने बच्चों की उपस्थिति और स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव लाया। 20 तारीख को जिले के सभी स्कूलों में तिथि भोज और जन्मोत्सव का आयोजन होगा। केक कटिंग और सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों के उत्साह को देखकर लगता है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खुशी और साथ की भावना भी देती है।
ड्रॉपआउट रोकने की चुनौती
संयुक्त सचिव चेतना नंद सिंह ने शिक्षकों से कहा कि हर बच्चे का स्कूल में बने रहना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षक-छात्र और माता-पिता के बीच बेहतर संवाद पर जोर दिया। “किसी बच्चे को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए,” उन्होंने कहा। सिर्फ निर्देश नहीं, बल्कि संवाद और समझ से यह संदेश बच्चों तक पहुंचता है। शिक्षक अब सिर्फ पढ़ा रहे हैं, बल्कि बच्चों की जिंदगी में बदलाव ला रहे हैं।
सम्मान और प्रेरणा
बैठक में जिले के स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को उनके योगदान और नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा, कबड्डी टीम और बीपीओ स्टाफ को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सेवा के लिए पुरस्कार दिए गए। रसोइया दीदियों को प्रेशर कुकर और स्टाफ को लैपटॉप दिए गए। यह सब केवल पुरस्कार और सुविधाओं तक सीमित नहीं था। हर पुरस्कार और हर हस्तांतरण एक कहानी कहता है – मेहनत, समर्पण और बच्चों के भविष्य में विश्वास की कहानी।
छोटे कदम, बड़ी उम्मीद
डीसी मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के लिए किए जा रहे प्रयासों में लगातार सुधार हो रहा है। जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल स्कूलों की रैंकिंग बढ़ाना नहीं है, बल्कि हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना है।
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