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Chaibasa : उनके हाथों में किताबें होनी थीं, आंखों में सपने और दिल में आगे बढ़ने की उम्मीद। लेकिन शिक्षा के नाम पर उन्हें सरहद पार नेपाल ले जाया गया, जहां पढ़ाई नहीं, बल्कि एक अनजाना डर उनका इंतजार कर रहा था। चाईबासा के गांवों से निकले ये मासूम नाबालिग बच्चे यह नहीं जानते थे कि जिस भरोसे के सहारे वे घर से निकले हैं, वही भरोसा उन्हें बेच देने की साजिश में बदल जाएगा।
मां ने कहा था, पढ़-लिख लेना
रांगामाटी गांव की एक मां की आंखें भर आती हैं। वह कहती हैं, “लोग आए थे, बोले बच्चा पढ़ेगा, बड़ा आदमी बनेगा। हमने सोचा किस्मत बदल जाएगी।” गरीब परिवार, सीमित साधन और बेहतर भविष्य का सपना। यही कमजोरी तस्करों की सबसे बड़ी ताकत बन गई।
सरहद पार, जहां सपने टूटने लगे
मासूम बच्चों को बेहतर शिक्षा का लालच देकर नेपाल के भक्तपुर स्थित एक संस्थान में रखा गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य बताया गया, लेकिन धीरे-धीरे बच्चों को अहसास होने लगा कि यहां पढ़ाई से ज्यादा बंधन हैं। न घर से बात, न बाहर जाने की आज़ादी। डर ऐसा कि कई बच्चे बोल भी नहीं पाते थे।
दो बच्चों की हिम्मत, जो बनी उम्मीद की किरण
11 में से दो नाबालिग किसी तरह वहां से भाग निकले और जान जोखिम में डालकर अपने गांव पहुंचे। कांपती आवाज में उन्होंने जो बताया, उसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यही दो बच्चे बाकी बच्चों के लिए उम्मीद की पहली रोशनी बने।
जब पुलिस ने सिर्फ फाइल नहीं, बच्चों की तकलीफ पढ़ी
मामला सामने आते ही चाईबासा पुलिस हरकत में आई। यह सिर्फ एक केस नहीं था, यह बच्चों की जिंदगी थी। एसपी अमित रेणु लगातार नेपाल प्राधिकारी से संपर्क में रहे। हर संदेश, हर सूचना मानो किसी बच्चे की सांस से जुड़ी हो। दूसरी ओर बनी टीम दिन-रात एक-एक कड़ी जोड़ती रही।
नेपाल में दस्तक और बच्चों की वापसी
आखिर वह दिन आया, जब नेपाल प्राधिकारी के सहयोग से छापेमारी हुई। डर के साए में जी रहे 6 नाबालिगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब वे अपने गांव लौटे, तो मां-बाप ने उन्हें ऐसे गले लगाया जैसे दोबारा जन्म मिला हो।
घर लौटे, पर सवाल अब भी बाकी
बच्चे तो घर आ गए, लेकिन सवाल कई हैं। शिक्षा के नाम पर तस्करी करने वाले कौन हैं। कितने और बच्चे अब भी जाल में फंसे हैं। पुलिस का कहना है कि तस्करों की तलाश जारी है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
एक अपील, ताकि कोई और बच्चा न खोए बचपन
यह कहानी सिर्फ 6 बच्चों की नहीं है। यह उन सैकड़ों परिवारों की चेतावनी है, जो मजबूरी में अजनबियों पर भरोसा कर लेते हैं। अगर कोई शिक्षा, नौकरी या बेहतर भविष्य का झांसा दे, तो पहले सच परखें। जरा सी सतर्कता किसी बच्चे का बचपन बचा सकती है। अगर आपको भी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले, तो चुप न रहें। नजदीकी थाना, डायल 112 या पुलिस कंट्रोल नंबर 9508243546 पर सूचना दें। क्योंकि कभी-कभी एक फोन कॉल, किसी बच्चे की पूरी जिंदगी बदल सकता है।
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