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Ranchi : झारखंड ATS ने राज्य के कुख्यात अपराधियों और उनके करीबियों की काली कमाई पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब तक आधा दर्जन से ज्यादा गैंगस्टर्स और उनके रिश्तेदारों की बेनामी संपत्ति की जांच चल रही है। ATS ने साफ कर दिया है कि जो लोग अपनी संपत्ति का सही-सही हिसाब नहीं देंगे, उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
10 से ज्यादा लोगों को भेजा गया नोटिस
एटीएस ने 10 से ज्यादा लोगों की पहचान की है, जो संगठित आपराधिक गिरोह की कमाई को अपने कारोबार में लगाकर मुनाफा कमा रहे थे। इन लोगों को नोटिस जारी कर संपत्ति का पूरा ब्यौरा मांगा गया है। उन्हें यह साबित करना होगा कि उनकी संपत्ति में अपराधियों की कमाई का कोई हिस्सा शामिल नहीं है। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
इन अपराधियों पर कार्रवाई
एटीएस की नजर जिन कुख्यात अपराधियों और उनके नेटवर्क पर है, उनमें अमन श्रीवास्तव, सुजीत सिन्हा, प्रिंस खान, डब्लू सिंह, मयंक सिंह और विकास तिवारी जैसे नाम शामिल हैं। इन गैंगस्टर्स ने अपराध की कमाई से करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी की है। अब एटीएस धीरे-धीरे उनकी चल-अचल संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेगी।
नया कानून बना हथियार
झारखंड एटीएस एसपी ऋषभ झा ने मीडिया को बताया कि नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111(6) के तहत यह प्रावधान है कि अगर कोई संपत्ति अपराध की कमाई से खरीदी गई है, चाहे वह सीधे अपराधी के नाम पर हो या उसके रिश्तेदार/करीबी के नाम पर, पुलिस उसे जब्त कर सकती है।
- नोटिस मिलने पर संबंधित व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि संपत्ति में अपराधियों के पैसों का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
- अगर वे सबूत देने में नाकाम रहते हैं, तो संपत्ति जब्त कर ली जाएगी और 3 साल तक की सजा भी हो सकती है।
रिमांड पर पूछताछ से मिली जानकारी
एटीएस ने अमन श्रीवास्तव, सुजीत सिन्हा, प्रिंस खान, डब्लू सिंह, मयंक सिंह और विकास तिवारी जैसे गैंगस्टर्स की काली कमाई को कारोबार में लगाने वाले सफेदपोशों और उनके करीबी रिश्तेदारों की पहचान की है। इन सभी को नोटिस भेजा गया है, जिसमें उनसे उनकी संपत्ति की जानकारी मांगी गई है।
क्या होगा आगे?
- अपराधियों के नाम पर मौजूद संपत्ति सीधे जब्त होगी।
- जो संपत्ति रिश्तेदारों या करीबियों के नाम पर है, उनके मालिकों को नोटिस भेजा जाएगा।
- अगर वे साबित नहीं कर पाए कि संपत्ति लीगल है, तो उसे भी जब्त कर लिया जाएगा।
साफ है कि झारखंड एटीएस अब सिर्फ अपराधियों को जेल भेजने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनकी अवैध कमाई और आर्थिक ताकत को भी खत्म करने की तैयारी में है।
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