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Giridih : सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज को विशेष सामाजिक अधिकार मिले हैं, जिन्हें भारत के संविधान में भी पूरी मान्यता दी गई है। देश में ऐसे कई इलाके हैं जहां आदिवासी समाज की रजामंदी के बिना कोई भी काम शुरू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मारांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण और देखरेख करना हम सभी की जिम्मेदारी है। सीएम गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संताली भाषा में भाषण की शुरुआत की और समाज को मजबूत व एकजुट बनाने का भरोसा दिलाया। इससे पहले मधुबन स्थित सीआरपीएफ कैंप में बने हेलीपैड पर पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने सीएम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

जल, जंगल और परंपरा से जुड़कर आगे बढ़ें
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज है। इसकी जड़ें काफी गहरी हैं, लेकिन समय के साथ शाखाएं अलग हो गई हैं। आज समाज के कुछ लोग खुद को हिंदू मानते हैं तो कुछ सरना कहते हैं। लोग जनजातीय भाषा भी बोल रहे हैं और हिंदी भी अपना रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि हमारे पूर्वज जंगलों में बसे थे और जंगल हमारे लिए भगवान की तरह हैं। सीएम ने अपने माता-पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रूपी सोरेन को याद करते हुए कहा कि उनके निधन के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार द्वादशकर्म किया गया। उन्होंने युवाओं से कहा कि दुनिया चांद तक पहुंच चुकी है, लेकिन आदिवासी समाज पढ़ाई-लिखाई और आर्थिक रूप से अब भी पीछे है। खेती और पशुपालन जैसे पुराने साधन छूट रहे हैं। ऐसे में युवाओं को अपनी संस्कृति और इतिहास को समझते हुए आगे आना होगा।

नशाखोरी समाज की सबसे बड़ी कमजोरी
सीएम ने चिंता जताते हुए कहा कि नशा समाज को भीतर से खोखला कर रहा है। लोग इसकी गिरफ्त में आकर बर्बाद हो रहे हैं। सरकार नशामुक्त जीवन के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। हड़िया और शराब के अवैध धंधे से महिलाओं को बाहर निकालने के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना शुरू की गई है, ताकि महिलाएं सम्मानजनक काम कर सकें। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नशे से पूरी तरह दूरी बनाएं। सीएम ने कहा कि पिछले दो सालों में उन्होंने कई करीबी लोगों को खोया है, जिसमें पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड बने 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन जितना विकास होना चाहिए था, उतना अभी तक नहीं हुआ। इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

सम्मेलन के दौरान मंच से मिले ज्ञापन पर सीएम ने कहा कि इस पर सही और न्यायसंगत कदम उठाए जाएंगे। इस मौके पर विधायक कल्पना सोरेन, विधायक सोमेश सोरेन, मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू और सचिव विष्णु किस्कू मौजूद रहे। इसके अलावा असम, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से आए समाज के कई प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

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