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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के हिरणपुर प्रखंड के डांगापाड़ा पंचायत सचिवालय में अफसरों की हलचल तो दिख रही थी, लेकिन माहौल में सबसे ज्यादा चर्चा एक ही बात की थी कि आज खुद डीसी मनीष कुमार आने वाले हैं। कई लोगों की नजरें उस रास्ते पर थीं जहां से डीसी की गाड़ी आने वाली थी। जैसे ही डीसी सचिवालय पहुंचे, उन्होंने परंपरागत औपचारिकता में समय नहीं गंवाया। वे सीधे उन जगहों पर गए जहां आम लोग पहले कदम रखते हैं। उन्होंने वही देखा जो एक सामान्य ग्रामीण रोज देखता है। परिसर की सफाई, सेवा काउंटरों की स्थिति और यह कि एक बुजुर्ग या महिला यहां आकर कितनी आसानी से अपनी बात रख पाएगी।
रजिस्टर ही नहीं, उन पर दर्ज उम्मीदों को भी पढ़ा
अंदर जाते ही उन्होंने पंजियों और रजिस्टरों को सिर्फ कागजों के रूप में नहीं देखा। हर अभिलेख में उन्हें गांव के लोगों की जरूरतें, शिकायतें और उम्मीदें नजर आईं। पंचायत सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेजों को देखते हुए उन्होंने पूछा कि क्या इन योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। कई कर्मचारियों से उन्होंने सीधे बात की और काम की असल स्थिति जानी।
सुविधाएं लगी थीं, लेकिन सवाल था कि क्या वे चल भी रही हैं
सचिवालय परिसर में भस्मक से लेकर कचरा सेग्रीगेशन बीन तक, सब कुछ मौजूद था। लेकिन डीसी ने केवल मौजूदगी नहीं देखी, उन्होंने यह भी जांचा कि लोग इनका उपयोग कर पा रहे हैं या नहीं। वाटर प्यूरीफायर की टोंटी से पानी निकलवाकर देखा, हैंड वॉश यूनिट की स्थिति पर सवाल किया, और रिकॉर्ड रूम में जाकर यह देखा कि दस्तावेज कितने व्यवस्थित हैं।

सफाई पर उनकी प्रतिक्रिया, जैसे किसी घर की चिंता
निरीक्षण के दौरान जब कुछ कोनों में धूल और अव्यवस्था मिली, तो उनका स्वर थोड़ा सख्त हुआ। उन्होंने कहा कि सचिवालय ऐसा होना चाहिए जहां लोग बिना झिझक आएं। साफ-सफाई सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए सम्मान की बात है।
शिकायतों के समाधान का भरोसा
डीसी ने कर्मचारियों से कहा कि शिकायतें सिर्फ दर्ज न हों, बल्कि समय पर निपटाई भी जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर अभिलेख अद्यतन होना चाहिए क्योंकि शासन के पास पहुंचने वाली हर जानकारी लोगों की आवाज है।
जब निरीक्षण खत्म हुआ, कई लोगों की उम्मीदें लौट आईं
जैसे ही डीसी वहां से निकले, कई ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। उन्हें लगा कि आज उनकी बात किसी ने सुनी है। सचिवालय के कर्मचारी भी समझ गए कि आज का निरीक्षण सिर्फ औपचारिक दौरा नहीं था। यह उस प्रणाली की धड़कन टटोलने जैसा था, जिस पर गांव का भरोसा टिका है।
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