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Home » कानून को ठेंगा… रात के अंधेरे में जहर की बारिश… जानें
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कानून को ठेंगा… रात के अंधेरे में जहर की बारिश… जानें

February 20, 2026No Comments4 Mins Read
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फ्लाई ऐश
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Ramgarh (Dharmendra Pradhan, Bhurkunda) : भुरकुंडा को चोरघरा अक्सर दिन में शांत दिखता है। बच्चे गलियों में खेलते हैं, महिलाएं चापाकल पर पानी भरती हैं और बुजुर्ग पीपल के नीचे बैठकर बीते दिनों की बातें करते हैं। लेकिन जैसे ही रात गहराती है, गांव की यह शांति डर में बदल जाती है। भारी ट्रकों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है, धूल का गुबार उठता है और देखते ही देखते खाली पड़ी जमीन पर फ्लाई ऐश के ढेर लग जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, दिन में सब “क्लीन” और रात में खेल “डर्टी”। भारी ट्रक सुनसान वक्त में पहुंचते हैं, फ्लाई ऐश गिरता है और सुबह तक जमीन पर ढेर।

ग्रामीणों का इल्जाम है कि मां छिन्मस्तिका प्लांट हेहल द्वारा रात के अंधेरे में सार्वजनिक जमीन पर अवैध रूप से फ्लाई ऐश डंप किया जा जाता है। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि गांव के लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध है, जिसे अंधेरे का सहारा लेकर अंजाम दिया जा रहा है। वहीं, जिम्मेदार मौनी बाबा बने हुए हैं।

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“सुबह उठते ही धूल ही धूल दिखती है”

गांव की एक बुजुर्ग महिला कहती हैं, “पहले यहां खुली जमीन थी, बच्चे खेलते थे। अब सुबह उठते ही धूल ही धूल दिखती है। हवा चलती है तो सांस लेना मुश्किल हो जाता है।” उनकी आंखों में चिंता साफ झलकती है, डर इस बात का कि आने वाले समय में उनके पोते-पोतियों को क्या विरासत मिलेगी।

पानी पर भी मंडराने लगा खतरा

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता पानी को लेकर है। लोगों का कहना है कि अगर फ्लाई ऐश ऐसे ही पड़ा रहा तो जमीन के नीचे का पानी भी जहरीला हो सकता है। एक युवक बताता है, “हम खेती-किसानी पर निर्भर हैं। अगर पानी खराब हो गया तो न खेत बचेगा, न मवेशी।”

सार्वजनिक जमीन पर फ्लाई ऐश डंपिंग, पर्यावरण की खुली हत्या

फ्लाई ऐश जैसे खतरनाक औद्योगिक कचरे को सार्वजनिक भूमि पर फेंकना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण की खुली हत्या भी। खेतों और खाली जमीनों के आसपास घूमने वाले पशु-पक्षी भी अब कम नजर आने लगे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि फ्लाई ऐश की वजह से उनका प्राकृतिक ठिकाना खत्म हो रहा है। एक बुजुर्ग किसान भावुक होकर कहते हैं “यह सिर्फ इंसानों की लड़ाई नहीं है, यह प्रकृति को बचाने की लड़ाई है।”

पंचायत का आक्रोश… “यह गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं”

पंचायत मुखिया जयनारायण प्रसाद, बिट्टू कुमार, ललित नायक, बीरबल तुरी, सुलेन्द साव, दिलीप कुमार, दीपक कुमार, मुनेशर कुमार और गांवके अनय लोग कहते हैं कि यह कृत्य न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि अमानवीय भी है। उनका कहना है कि “रात के अंधेरे में कचरा डालकर कोई भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। हम अपने गांव को मरने नहीं देंगे।” वहीं, कुछ लोग कह रहे हैं कि हवा में उड़ती राख सांसों में घुस रही है। बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों पर असर साफ दिख रहा है। आरोप है कि कंपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए रात का रास्ता चुन रही है, ताकि न फोटो बने, न सवाल उठें।

प्रशासन से उम्मीद, आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अवैध रूप से डंप किए गए फ्लाई ऐश को जल्द हटाने की अपील की गई है। लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो वे जनआंदोलन और कानूनी लड़ाई के लिए मजबूर होंगे।

मिट्टी बचाने की जंग

चोरघरा पंचायत आज एक सवाल पूछ रही है, विकास के नाम पर क्या गांवों की सांसें छीनी जाएंगी? यहां के लोग कहते हैं कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने जीवन और पर्यावरण की कीमत पर नहीं। यह लड़ाई सिर्फ फ्लाई ऐश के ढेर हटाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की है।

इसे भी पढ़ें : जांच में देरी नहीं चलेगी, संयुक्त सचिव और डीजीपी की हाईलेवल मीटिंग में बड़ा फैसला… जानें

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