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Ramgarh (Dharmendra Pradhan, Bhurkunda) : भुरकुंडा के सुंदरनगर में सोमवार की सुबह कुछ अलग थी। चेहरे पर झिझक भी थी और चमक भी। वजह था एक ऐसा कदम, जो सिर्फ ट्रेनिंग सेंटर का उद्घाटन नहीं बल्कि कई जिंदगियों की दिशा बदलने की कोशिश है। रामगढ़ जिला प्रशासन की पहल पर यहां ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए ब्यूटिशियन ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की गई। फीता कटा, दीप जला और साथ ही कई सपनों को एक ठोस रास्ता मिला। इस कार्यक्रम में डीएमडब्ल्यू इंदु प्रभा खलखो और पतरातू बीडीओ मनोज गुप्ता मौजूद रहे।
“हम भी कुछ बन सकते हैं”
मौके पर मौजूद मोहिनी ने धीमी आवाज में कहा, “लोग हमें देखकर पहचान लेते हैं, लेकिन कभी हमारे हुनर को पहचानने की कोशिश नहीं करते।” यही सोच बदलने की कोशिश है यह ट्रेनिंग। 15 दिनों तक चलने वाले इस कोर्स में मेकअप, हेयर स्टाइलिंग, स्किन केयर और पार्लर मैनेजमेंट सिखाया जाएगा। मकसद साफ है, ताकि ट्रेनिंग के बाद ये प्रतिभागी खुद का काम शुरू कर सकें और सम्मान के साथ कमाई कर सकें। एलडीएम दिलीप महली ने बताया कि यह कार्यक्रम उपायुक्त के निर्देश पर रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स के तहत शुरू हुआ है। इसमें Bank of India हजारीबाग भी सहयोग कर रहा है।

कागज से पहचान, हुनर से सम्मान
डीएमडब्ल्यू इंदु प्रभा खलखो ने कहा कि अब कोशिश यह है कि जिले के सभी ट्रांसजेंडर सरकारी योजनाओं से जुड़ें। राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने में भी प्रशासन मदद कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि आत्मनिर्भरता सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि समाज में बराबरी से खड़े होने का हक भी देती है।
ताने से तालियों तक का सफर
समुदाय का नेतृत्व करने वाली गुरु अरुणा कहती हैं कि “हमने जिंदगी में बहुत ताने सुने हैं। अब वक्त है कि हमारे काम पर ताली बजे।” उनकी यह बात वहां मौजूद कई लोगों की आंखों में नमी और उम्मीद दोनों ले आई। अब तक जिन हाथों को लोग सिर्फ तालियां बजाते हुए देखते थे, वही हाथ अब ब्रश और कैंची थामेंगे।
समाज के लिए भी एक संदेश
बीडीओ मनोज गुप्ता ने कहा कि यह कोर्स रोजगार के लिहाज से बड़ा मौका है। उनका मानना है कि अगर समाज साथ दे, तो ट्रांसजेंडर समुदाय भी दूसरे युवाओं की तरह आगे बढ़ सकता है। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, बैंक अधिकारी और समुदाय के कई सदस्य मौजूद रहे। लेकिन असली मायने उन मुस्कुराहटों में थे, जो लंबे समय बाद किसी अपनेपन के एहसास से आई थीं।
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