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Ranchi : किसी भी पिता के लिए उसका बेटा सिर्फ खून का रिश्ता नहीं होता। उसमें उसकी उम्मीदें, सपने और भविष्य छिपा होता है। लेकिन जब वही बेटा हाथ से फिसल जाए, तो पिता का दिल धीरे-धीरे टूटता है, बिल्कुल चुपचाप, बिना आवाज किए। लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र के 54 वर्षीय कलेशवर सिंह की आंखों में भी कुछ ऐसा ही दर्द तैरता दिखा। उन्होंने अपने बड़े बेटे राहुल सिंह से आज वह रिश्ता नाता तोड़ दिया, जिसे जोड़ने में उन्होंने जिंदगी की पूरी मेहनत लगा दी। राहुल सिंह वही है जिसके खिलाफ झारखंड के अलग-अलग थानों की पुलिस फाइल में कई संगीन मामले दर्ज हैं। महज 22 साल का राहुल सिंह अब खतरनाक गैंगस्टर बन चुका है। आये दिन लोगों को कारोबारियों को डराना-हड़काना, रंगदारी वसूलना और गोलीबारी कर दहशत फैलाना कुख्यात राहुल की फितरत बन चुकी है। शातिर इतना हो चुका है कि सरहद पार बैठकर पूरे गिरोह को ऑपरेट कर रहा है।
राहुल से नाता तोड़ने का खुलासा उसके पिता कलेश्वर द्वारा करवाये गये एफिडेविट यानी शपथ पत्र से हुआ है। यह एफिडेविट अब खूब वायरल हो रहा है। वायरल हुए एफिडेविट में आठ नवंबर 2025 का तारीख अंकित है। हालांकि, वायरल हुए इस शपथ पत्र में कितना दम है, इसका आधिकारिक तौर पर कोई खुलासा नहीं हो पाया है।
झगड़ा कर घर से भागा था राहुल
चंदवा गांव के कलेशवर एक सामान्य ग्रामीण परिवार से हैं। दिन की धूप, खेत की मिट्टी, और साधारण सी ज़िंदगी, यही उनकी दुनिया है। पत्नी आरमी देवी घर संभालती हैं। दो बेटियां प्रतिमा और होलीका अब अपने-अपने ससुराल में खुश हैं। छोटा बेटा मनोहर रोज मजदूरी करके घर चलाने में मदद करता है। बड़ा बेटा राहुल कभी इस घर की जान था। पिता की जेब में कितने पैसे हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता था। घर में दाल-भात हो या सिर्फ नमक-रोटी, परिवार साथ था। लेकिन वक्त के साथ लोग बदल जाते हैं। संगत बदल जाती है और राह भी। राहुल गांव से दूर गलत लोगों के साथ जुड़ने लगा। स्वभाव बदल गया… बातों में कड़वाहट आने लगी… फिर करीब दो साल पहले एक दिन घरवालों से झगड़ा हुआ और वह घर छोड़कर चला गया।
पुलिस ने बताया, तो गिरा दिल पर पत्थर
कलेशवर बताते हैं, “कितना ढूंढे… किस-किस से पूछें… रात को भी सोचते रहे कि शायद कल आ जाएगा… लेकिन दिन बीतते गए।
राहुल नहीं लौटा।” लगभग एक साल पहले आखिर परिवार चंदवा थाना गया। शायद मन में अब भी उम्मीद थी कि पुलिस बताएगी वो सही है, अच्छा है। लेकिन वहां सुनी बात दिल में किसी पत्थर की तरह गिरी। राहुल सिंह अब गैंगस्टर बन गया है। वह असामाजिक तत्वों के साथ है और आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहा है। कलेशवर की आंखें उस वक्त भर आई थीं, पर आंसू टपकने नहीं दिया। कहते हैं न कि कभी-कभी मन इतना थक जाता है, आंसू भी रुक जाते हैं।
कलेशवर ने शपथ लेकर रिश्ता तोड़ा
उन्होंने नोटरी के सामने शपथ पत्र दिया कि आज से और हमेशा के लिए राहुल का परिवार और संपत्ति से कोई संबंध नहीं होगा।
उसके अपराधों की जवाबदेही परिवार नहीं लेगा। यह कानून था। लेकिन यह फैसला सिर्फ कागज पर नहीं, दिल के सबसे गहरे कोने पर लिखा गया। कलेशवर ने हौले से कहा- “हम सिर्फ दुआ करते हैं कि वह जहां भी है, सुधर जाए। हम दरवाज़ा बंद नहीं किए हैं… पर राह उसने खुद बदल ली है…” आज भले ही कलेशवर सिंह ने कागज पर रिश्ता तोड़ दिया। पर पिता के दिल में एक दरवाज़ा है, जो शायद आज बंद लगता हो… लेकिन उसमें एक छोटी सी इंतजार की खिड़की अब भी खुली है।

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