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Ranchi : रांची सेंट्रल जेल… जहां रोजमर्रा की ज़िंदगी सलाखों और कैद के बीच गुजरती है, वहां 2 अक्टूबर की सुबह कुछ अलग थी। गांधी जयंती के अवसर पर कारा परिसर में उम्मीद और राहत की किरण लेकर पहुंचा था जेल अदालत-सह-विधिक जागरूकता शिविर। इस आयोजन का मकसद सिर्फ कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं था, बल्कि उन बंदियों को न्याय दिलाना था जो लंबे समय से अदालतों में अपने मामलों के निपटारे की प्रतीक्षा कर रहे थे।
न्याय के दरवाजे तक पहुंची पहल
झालसा, रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित इस अदालत में न्यायिक दंडाधिकारी मयंक मलियाज और मनीश कुमार सिंह के साथ अन्य न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे। चार मामलों की सुनवाई हुई और एक बंदी को राहत मिली… उसे जेल अदालत के निर्णय के बाद तत्काल रिहा कर दिया गया। उस बंदी की आंखों में जो चमक थी, वह अदालत की कुर्सी पर बैठे न्यायाधीशों के लिए भी संतोष का क्षण था। सालों बाद आजादी का तोहफ़ा, वह भी गांधी जयंती पर, जैसे न्याय और करुणा का सजीव उदाहरण था।
बंदियों की समस्याएं और समाधान
शिविर में केवल मुकदमों का निपटारा ही नहीं हुआ, बल्कि बंदियों की समस्याएँ भी सुनी गईं। कारा कर्मियों को निर्देश दिया गया कि शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाए। साथ ही, विधिक जागरूकता कार्यक्रम के तहत बंदियों को उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर कारापाल, कारा लिपिक, कारा कर्मी, एल.ए.डी.सी. के सदस्य, न्यायालयकर्मी और स्वयं बंदीगण भी मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम ने कारा परिसर का माहौल बदल दिया—जहाँ आम दिनों में निराशा हावी रहती है, वहाँ इस दिन उम्मीद और विश्वास का संचार हुआ।
DLSA सचिव बोले- यह एक मिसाल
रांची के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) सचिव रवि भास्कर ने कहा कि इस तरह की पहल से बंदियों को त्वरित न्याय मिल रहा है। यह न केवल क़ानूनी प्रक्रिया को गति देता है बल्कि मानवता का भी संदेश देता है।
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