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Chaibasa : झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की 209 कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। जैसे ही जवानों ने सारंडा जंगल के भीतर कदम बढ़ाया, सामने से गोलियों की बौछार शुरू हो गई। जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया और कई मिनट तक दोनों ओर से गोलियां चलती रहीं। नक्सली जंगल की आड़ लेकर भाग निकले, लेकिन उनके पीछे उनकी योजना और हथियारों का जखीरा रह गया।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
मुठभेड़ खत्म होने के बाद जब जवानों ने इलाके में सर्च अभियान चलाया, तो वहां से जो मिला, उसने सबको चौंका दिया। दो एसएलआर राइफल, एक .303 राइफल, एके-47 के 37 गोलियां, एसएलआर की 78 गोलियां और .303 के 130 गोलियां बरामद की गयी। इसके अलावा 16 किलो से ज्यादा जिलेटिन, 13 तैयार आईईडी, 15 डिटोनेटर, पांच रेडियो सेट, दो इंटरसेप्टर और दो लैपटॉप भी मिले।
सुरक्षा बलों ने बताया कि नक्सली इस इलाके में फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहे थे। बरामद विस्फोटक सामग्री से साफ संकेत मिलते हैं कि वे किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे।
लगातार जारी है सर्च अभियान
मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। जंगल के हर रास्ते, हर पगडंडी पर नजर रखी जा रही है। झारखंड पुलिस ने साफ किया है कि नक्सलियों के ठिकाने पूरी तरह तबाह किए बिना अभियान नहीं रुकेगा।
कोबरा बटालियन की रणनीति से मिली सफलता
इस अभियान में कोबरा बटालियन की भूमिका अहम रही। जवानों की सूझबूझ और सटीक कार्रवाई के कारण नक्सलियों की साजिश नाकाम हो गई। पुलिस के अनुसार, किसी जवान को कोई चोट नहीं आई, जबकि नक्सलियों के भागने के संकेत मिले हैं।
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