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Home » असम में गरजे हेमंत सोरेन, बोले- अब झुकने का नहीं, हक लेने का वक्त है
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असम में गरजे हेमंत सोरेन, बोले- अब झुकने का नहीं, हक लेने का वक्त है

March 28, 2026No Comments4 Mins Read
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Assam/Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने असम में चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कोकराझार जिले के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में झामुमो प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के समर्थन में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। सभा में भारी संख्या में स्थानीय लोग, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक जुटे। हेमंत सोरेन ने मंच से साफ शब्दों में कहा कि यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं है, बल्कि आदिवासी और वंचित समाज के हक-अधिकार को मजबूत करने की लड़ाई है।

हेमंत बोले- झारखंड के आदिवासी कभी गुलामी नहीं माने

सभा को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने झारखंड की वीर परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासियों ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई और कभी गुलामी स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि अब समय झुकने का नहीं, बल्कि अपने अधिकार लेने का है। उन्होंने लोगों से अपील की कि चुनाव के समय होने वाले बहकावे और चालबाजियों से सावधान रहें।

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चाय बागान मजदूरों का हक अब तक अधूरा, हम साथ हैं

हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चाय बागान में काम करने वाले लोग देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक उनका पूरा हक और अधिकार नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि सालों से सिर्फ वादे और आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीन पर कुछ खास नहीं हुआ। उन्होंने मंच से कहा कि झामुमो इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी है।

भाजपा पर हमला, बोले- ये देने वाले नहीं, लेने वाले लोग हैं

भाजपा पर हमला बोलते हुए हेमन्त सोरेन ने कहा कि चुनाव के समय ये लोग लोगों के खाते में 500 या 1000 रुपये डालते हैं और चुनाव खत्म होते ही सिरिंज लगाकर खून निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा देने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि लेने वाली पार्टी है। जब तक इनका पेट और जेब नहीं भरता, तब तक ये किसी का भला नहीं करते। चुनाव में ये जाल डालते हैं और काम निकलते ही अपने वादे भूल जाते हैं।

हेमंत ने कहा- शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है, बच्चों को पढ़ाइए

हेमंत सोरेन ने लोगों से अपील की कि अपने बच्चों को हर हाल में पढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी ताकत शिक्षा है। अगर बच्चे पढ़ेंगे, आगे बढ़ेंगे तो समाज खुद मजबूत हो जाएगा। उन्होंने कहा कि असम के गरीब और वंचित परिवारों को भी शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।

झारखंड जैसी शिक्षा व्यवस्था असम में लाने की बात

मुख्यमंत्री ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति अब इतनी बेहतर हो रही है कि लोग निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड में सरकारी स्कूलों की 9 हजार सीटों के लिए 40 हजार बच्चों ने परीक्षा दी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव बेहतर शिक्षा व्यवस्था का नतीजा है और असम में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप

हेमन्त सोरेन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे और ताकत के दम पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ये लोग मंच से मीठी-मीठी बातें करते हैं, लेकिन जमीन की सच्चाई से उनका कोई लेना-देना नहीं होता। उन्होंने कहा कि वह लोगों को बहलाने नहीं, बल्कि सच्चाई बताने आए हैं।

अगली पीढ़ी को डॉक्टर, इंजीनियर बनाना ही असली सशक्तिकरण

हेमंत सोरेन ने कहा कि असली सशक्तिकरण तब होगा जब समाज की अगली पीढ़ी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर और पत्रकार बनेगी। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने आदिवासी युवाओं की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च उठाने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी ही व्यवस्था असम में भी होनी चाहिए, ताकि वंचित समाज को भी समान अवसर मिल सके और वे आगे बढ़ सकें।

जनसभा में दिखा जोश, समर्थकों ने किया स्वागत

सभा के दौरान समर्थकों में काफी उत्साह दिखा। बड़ी संख्या में लोग हेमन्त सोरेन को सुनने पहुंचे थे। मंच से झामुमो प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के समर्थन में लोगों से एकजुट होकर मतदान करने की अपील भी की गई। हेमंत सोरेन ने अंत में कहा कि यह लड़ाई सम्मान, अधिकार और बराबरी की है, और इस लड़ाई में जनता की ताकत ही सबसे बड़ा हथियार है।

इसे भी पढ़ें : डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखा 11 लोगों को लगाया चूना, CID ने रांची से दबोचा संदेही

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