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Chhapra : सारण जिले में नदियों के उफान से बाढ़ के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जिले के सात प्रखंडों की 35 पंचायतों में पानी भर चुका है, जिससे 109 गांवों की करीब 2 लाख 33 हजार आबादी प्रभावित हो गई है। सबसे गंभीर स्थिति डोरीगंज इलाके में देखने को मिल रही है, जहां बाढ़ का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया है। हालांकि गनीमत यह रही कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। जिला प्रशासन ने पानी से घिरे इलाकों से लोगों को बाहर निकालने का काम तेज कर दिया है और अब तक 1,206 लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाया गया है।
राहत और बचाव के लिए जलमार्ग से मोर्चबंदी
पानी में फंसे ग्रामीणों की मदद के लिए प्रशासन ने 155 देसी व सरकारी नावें उतारी हैं। इसके साथ ही राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) के छह राफ्ट सदर, दिघवारा और सोनपुर में दो-दो की संख्या में तैनात किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) की एक पूरी यूनिट भी जिले में बुलाई गई है। ये टीमें लगातार दूर-दराज के जलमग्न टोलों में जाकर लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही हैं और फंसे परिवारों को बाहर निकाल रही हैं।

पानी से घिरे मरीजों के लिए बोट एम्बुलेंस बनी सहारा
संक्रमण और बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य महकमे ने मोर्चा संभाल लिया है। जिले भर में 21 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जहां अब तक 1,371 मरीजों की जांच और दवा का वितरण किया गया है। जलजमाव वाले इलाकों से गंभीर मरीजों को मुख्य अस्पताल तक लाने के लिए छह बोट एम्बुलेंस दिन-रात चक्कर लगा रही हैं। इसके अलावा खुले आसमान के नीचे आए बेघर परिवारों के लिए 11 हजार 349 तिरपाल यानी पॉलीथिन शीट्स बांटी गई हैं। साथ ही 8 हजार 945 सूखे राशन के पैकेट घर-घर पहुंचाए जा रहे हैं ताकि कोई भूखा न सोए।
15 सामुदायिक रसोइयों में 12 हजार लोगों को मिला गर्म खाना
बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था के लिए जिले के पांच प्रमुख प्रखंडों में 15 कम्युनिटी किचन शुरू किए गए हैं। छपरा सदर और रिविलगंज में चार-चार, दिघवारा में तीन तथा सोनपुर और गड़खा में दो-दो रसोई केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर अब तक 12 हजार से ज्यादा लोग खाना खा चुके हैं। सदर के मुसेपुर चौक, तपसी सिंह हाई स्कूल, सिंधी चौक के अलावा रिविलगंज के साधुलाल स्कूल और जान टोला पुल जैसे प्रमुख स्थानों पर प्रभावित लोग दोनों वक्त का ताजा भोजन ले रहे हैं।
तटबंधों में आई दरार पाटने की होड़ और बेजुबानों की देखभाल
नदियों के बढ़ते दबाव से तटबंधों पर भी खतरा मंडराने लगा है। दिघवारा के त्रिलोकचक और दरियापुर के सिमरिया में बांध पर आई दरारों को जल संसाधन विभाग युद्धस्तर पर भरने में जुटा है, ताकि पानी गांवों में और तेजी से न फैले। वहीं, इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के चारे और इलाज के लिए आठ विशेष पशु कैंप शुरू किए गए हैं। इन शिविरों में 678 गाय-भैंसों को रखकर उनके चारे-पानी और टीकारण की व्यवस्था की गई है।
राहत शिविरों में बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
सोनपुर के सबलपुर और नजरमीरा जैसे बाढ़ पीड़ित इलाकों से आए बच्चों के लिए राहत शिविरों में पढ़ाई और खेलकूद के विशेष प्रबंध किए गए हैं। शिविरों में आंगनबाड़ी जैसा सुरक्षित माहौल तैयार किया गया है ताकि बच्चे घर छूटने के तनाव से दूर रह सकें। प्रशासन के अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर बच्चों के साथ बातचीत कर रहे हैं और उनके लिए मनोरंजन व चित्रकला जैसी गतिविधियां संचालित करा रहे हैं।
प्रभारी मंत्री ने लिया जायजा, लोगों से सतर्क रहने की अपील
सारण के प्रभारी मंत्री और बिहार के उप मुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने रविवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और पुलिस कप्तान रौशन कुमार ने उन्हें जमीनी हकीकत, राहत शिविरों और सुरक्षा इंतजामों की पूरी जानकारी दी। मंत्री ने निर्देश दिया कि राहत कार्यों में कोई ढिलाई न बरती जाए। वहीं जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बेवजह गहरे पानी में जाने से बचें, अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षित ठिकानों पर ही रहें।
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