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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिले का रविन्द्र भवन बुधवार को हर्षोल्लास से भरा था। दीप प्रज्वलन और पौधा में जल अर्पित करने के साथ ही जिले में पोषण माह 2025 का जिला स्तरीय समापन समारोह शुरू हुआ। इस साल पोषण माह की थीम थी—“कम तेल-घी की हो थाली, तब जीवन में होगी खुशहाली”। सजावट में रंग-बिरंगे पोस्टर, सेविकाओं द्वारा तैयार पौष्टिक व्यंजन और बच्चों की हँसी ने पूरे हॉल को उत्साह से भर दिया। सेविकाओं ने स्थानीय सामग्री से स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन तैयार किए, जिनका स्वाद अपर सचिव नीतीश्वर कुमार, डीसी मनीष कुमार और उप विकास आयुक्त महेश कुमार संथालिया ने लिया। उनके नवाचार और मेहनत की तारीफ सभी ने की।
सेविकाओं की मेहनत और नवाचार
इस अवसर पर सेविकाओं के योगदान को विभिन्न मंचों के माध्यम से सम्मानित किया गया। रंगोली, कविता, गीत, पोषण चर्चा और पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से उत्कृष्ट कार्य करने वाली सेविकाओं को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार दिए गए। इसके अलावा, ई-संजीवनी पोर्टल ऐप पर सबसे अधिक मरीजों का इलाज करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHOs) को लैपटॉप और प्रिंटर वितरित किए गए।

लाभुकों और कर्मियों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण
कार्यक्रम में जेएसएलपीएस दीदियों के लिए “बर्तन वितरण कार्यक्रम” की भी शुरुआत की गई। यह पहल महिलाओं के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक स्वर्णिम कदम है। साथ ही, JIASOWA दीपावली मेले में ‘Roots of पाकुड़’ और ‘आकांक्षा हाट’ में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पदाधिकारी और कर्मियों को सम्मानित किया गया।
क्या संदेश दे गये अपर सचिव और डीसी
डीसी मनीष कुमार ने अपने संबोधन में कहा, “सेविका शब्द स्वयं में ‘सेवा’ का प्रतीक है। सेवा, समर्पण और संकल्प की भावना से ही वास्तविक विकास संभव है। पाकुड़ की दीदियां इसी भावना के साथ कार्य कर रही हैं।” उन्होंने जिले की विकास पहलों जैसे प्रोजेक्ट बदलाव, प्रोजेक्ट जागृति, प्रोजेक्ट बचपन और प्रोजेक्ट परख का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें अब जिले की पहचान बन चुकी हैं।
अपर सचिव नीतीश्वर कुमार ने भी जिले के अधिकारियों और कर्मियों के उत्साह और संवेदनशीलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार और प्रशिक्षण से जिले में और अधिक सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे।
स्वास्थ्य और पोषण में हुए सुधार
पाकुड़ जिले में मलेरिया, कालाजार और फाइलेरिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है। यह उपलब्धि जिला प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मियों और आम जनता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि समर्पित सेविकाओं और संवेदनशील अधिकारियों के प्रयासों से कुपोषण और स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ सफलता संभव है। समापन अवसर पर उपस्थित सभी ने यह संकल्प लिया कि वे “कुपोषण मुक्त झारखंड” के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देंगे।
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