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Palamu : बुधवार का दिन समाहरणालय सभागार में विशेष था। पलामू के ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर डीसी समीरा एस के सामने खड़े थे। हर चेहरा अपने संघर्ष और उम्मीदों का आईना था। जनता दरबार सिर्फ शिकायत सुनने का मंच नहीं, बल्कि लोगों के लिए उम्मीद की किरण था।
बेवा का दर्द : पति की मौत और कर्ज का बोझ
मनातू की एक विधवा महिला की कहानी सबको रुला दे। दो महीने पहले गुड्डू यादव, रोजगार की तलाश में हिमाचल प्रदेश गए थे। 27 सितंबर को उनकी मौत हो गई। गांव के लोगों से कर्ज लेकर शव को वापस लाकर दाह-संस्कार करना पड़ा। “मेरे पति की आमदनी पर ही घर चलता था। अब मैं कर्ज का बोझ उठाए अकेली रह गई हूं,” उन्होंने आंसू भरे स्वर में बताया। उनकी आंखों में न केवल दर्द था, बल्कि भविष्य की अनिश्चितता का भय भी। उन्होंने डीसी से श्रम कानून के तहत मुआवजा देने का अनुरोध किया।
योजनाओं में गड़बड़ी और धोखा, ग्रामीणों की शिकायतें
राहुल प्रसाद ने अबुआ आवास योजना की राशि किसी और के खाते में जाने की शिकायत की। चैनपुर के गौरव कुमार पांडेय ने बताया कि पीएम कुसुम योजना के तहत उन्हें 2022 में चयनित किया गया, लेकिन अब तक सोलर पंप उनके खेत में नहीं लगा। इन शिकायतों में केवल योजनाओं की खामियां नहीं थीं, बल्कि ग्रामीणों की मेहनत और भरोसे की कीमत भी झलक रही थी।
महिलाओं की उम्मीद : मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना
विभिन्न अंचलों की महिलाएं भी आईं। उन्होंने बताया कि मईया सम्मान योजना की राशि नहीं मिली। हर महिला की कहानी अलग थी, लेकिन उनकी आवाज़ में एक समान धड़कन थी – सम्मान और न्याय की। समीरा एस ने सभी आवेदनों को सामाजिक सुरक्षा विभाग को जांच के लिए भेजा और भरोसा दिलाया कि न्याय मिलेगा।
भूमि विवाद, जलापूर्ति और अन्य समस्याएं
जनता दरबार में भूमि विवाद, सार्वजनिक रास्ता रोकने, अयोग्य लाभुकों को पीएम आवास मिलने, दाखिल-खारिज, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपूर्ति, पेयजल और कल्याण विभाग से जुड़ी अनगिनत शिकायतें आईं। हर आवेदन के पीछे एक जीवित कहानी, संघर्ष और उम्मीद थी। डीसी ने सभी विभागों को 15 दिनों में निष्पक्ष कार्रवाई का निर्देश दिया।
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