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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा की हवा में इन दिनों त्योहारों की खुशबू घुल गई है। पंडालों में रंग-बिरंगी लाइटें सजने लगी हैं, ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देने लगी है और गलियों-बाज़ारों में रौनक लौट आई है। लेकिन इस उमंग और भीड़भाड़ के बीच एक चिंता हमेशा रहती है… सब कुछ सुरक्षित और शांतिपूर्ण कैसे रहे? इसी चिंता को दूर करने के लिए सोमवार को गढ़वा समाहरणालय में शांति समिति की बैठक हुई।
सुरक्षा की जिम्मेदारी, सौहार्द की ताकत
बैठक में डीसी दिनेश यादव और एसपी अमन कुमार केवल प्रशासनिक आदेश देने नहीं बैठे थे। वे लोगों की भावनाओं को समझने और भरोसा दिलाने आए थे। डीसी ने कहा, “त्योहार सिर्फ पूजा-अर्चना का नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और भाईचारे का भी होता है। प्रशासन अकेले कुछ नहीं कर सकता, समाज का सहयोग ही सबसे बड़ी ताकत है।”
शांति समिति के सदस्य भी इसी भावना के साथ मौजूद थे। उन्होंने बताया कि गढ़वा में दुर्गा पूजा हमेशा से ही सभी समुदायों की साझी धरोहर रही है। कोई हिंदू हो या मुसलमान, हर मोहल्ले में लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं। यही वजह है कि उपायुक्त ने संतोष जताया और लोगों से अपील की कि इस परंपरा को आगे भी बनाए रखें।
“हमारी बहनों-बेटियों की सुरक्षा पहले”
इस बैठक का सबसे भावुक पल तब आया, जब महिला प्रतिनिधियों ने पंडालों में महिलाओं के लिए अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाने की मांग रखी। डीसी ने तुरंत इस पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा ही प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
साफ-सफाई और रोशनी… त्योहार की असली रौनक
नगर परिषद को खास तौर पर निर्देश दिया गया कि पंडालों के आसपास की साफ-सफाई, पेयजल और लाइटिंग की व्यवस्था बेहतरीन हो। “अगर रोशनी नहीं होगी तो त्योहार का रंग फीका पड़ जाएगा,” बैठक में मौजूद एक बुजुर्ग समिति सदस्य ने कहा। उनकी बात ने सभी को याद दिलाया कि छोटी-छोटी सुविधाएं ही बड़े आयोजन को सुंदर बनाती हैं।
एसपी ने दिये ये निर्देश
एसपी अमन कुमार ने कहा कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने पूजा समितियों को याद दिलाया कि “आग और हादसे सिर्फ पलक झपकते ही हो जाते हैं। पानी और बालू का इंतज़ाम हर पंडाल में होना चाहिए।” उनकी यह बात कई सदस्यों को आश्वस्त करने वाली लगी। सीसीटीवी कैमरे लगाने और स्वयंसेवकों को पहचान पत्र व एक जैसी वर्दी देने का निर्णय भी इसीलिए लिया गया ताकि भीड़ में हर किसी को सुरक्षा का अहसास हो।
सदस्यों की छोटी-छोटी लेकिन अहम मांगें
शांति समिति के सदस्यों ने व्यावहारिक सुझाव रखे… तंग गलियों से अतिक्रमण हटे, ताकि जुलूस आसानी से निकल सके। टूटी सड़कों की मरम्मत हो और विसर्जन स्थलों पर गोताखोर हमेशा तैयार रहें। इन मांगों के पीछे सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं से बचाने की सच्ची चिंता झलक रही थी।
त्योहार का असली संदेश
बैठक का समापन दशहरे की शुभकामनाओं के साथ हुआ। लेकिन माहौल यह बता रहा था कि असली संदेश सिर्फ त्योहार मनाने का नहीं, बल्कि इसे सुरक्षित, शांतिपूर्ण और मिलजुल कर मनाने का है। उपायुक्त ने यह भी घोषणा की कि जो पूजा पंडाल सबसे व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से आयोजन करेगा, उसे प्रशासन पुरस्कृत करेगा।
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