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Ranchi : कुछ मौके औपचारिक कार्यक्रम नहीं होते, वे भीतर तक छू जाने वाली मुलाकात बन जाते हैं। दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन की 82वीं जयंती पर रांची के चेशायर होम में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब सीएम हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे। यह जयंती अलग थी। सीएम हेमंत ने खुद कहा कि यह पहला अवसर है, जब बाबा शिबू सोरेन की जयंती उनके बिना मनाई जा रही है। बच्चों के बीच खड़े होकर उन्होंने अपने पिता को याद किया और बताया कि गुरुजी का पूरा जीवन संघर्ष, त्याग और कमजोर तबकों के हक की लड़ाई को समर्पित रहा। उनकी आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं।
बच्चों के बीच बिना दूरी के मुख्यमंत्री
चेशायर होम के परिसर में कोई मंचीय दूरी नहीं दिखी। मुख्यमंत्री बच्चों के पास बैठे, उनसे नाम पूछा, पढ़ाई और पसंदीदा चीजों पर बात की। कई बच्चे अपनी बात कहने में झिझक रहे थे, तो कुछ खुलकर मुस्कुराते हुए संवाद कर रहे थे। यही वे पल थे, जब कार्यक्रम एक खबर से ज्यादा एक मानवीय अनुभव बन गया।

हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन
सीएम हेमंत ने कहा कि चेशायर होम से उनका पुराना और भावनात्मक रिश्ता है। वे पहले भी यहां आते रहे हैं और हर बार बच्चों की प्रतिभा देखकर प्रभावित हुए हैं। उनके शब्दों में भरोसा था कि इन बच्चों की ताकत और आत्मविश्वास किसी से कम नहीं है, बस उन्हें सही सहयोग और अवसर की जरूरत है। इस दौरान बच्चों के बीच कंबल और जरूरी सामग्री बांटी गई। यह केवल वितरण नहीं था, बल्कि एक संदेश था कि सरकार और समाज दोनों इन बच्चों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने संस्था को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

कल्पना ने बढ़ाया बच्चों का हौसला
विधायक कल्पना सोरेन ने भी बच्चों से बातचीत की और संस्था में हो रहे सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे अकेले नहीं हैं, पूरा समाज उनके साथ है।

विरासत जो संवेदना सिखाती है
चेशायर होम की शांत दीवारों के बीच यह जयंती सिर्फ एक तारीख नहीं रही। यह दिन याद दिला गया कि शिबू सोरेन की असली विरासत संघर्ष के साथ-साथ संवेदना और साथ खड़े होने की भावना है। शायद यही कारण है कि यह जयंती एक खबर से आगे बढ़कर एक मानवीय कहानी बन गई।

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