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Home » अदाणी फाउंडेशन ने बुझाई प्यास, 430 बेटियों के सपनों को मिला सहारा
झारखंड

अदाणी फाउंडेशन ने बुझाई प्यास, 430 बेटियों के सपनों को मिला सहारा

January 11, 2026No Comments4 Mins Read
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Hazaribagh (Barkagaon) : सुबह का वक्त, स्कूल की घंटी बजने से पहले ही छात्राएं लाइन में खड़ी। हाथ में किताबें, चेहरों पर सुकून। यह सुकून कुछ महीने पहले तक यहां नहीं था। वजह थी पानी। वही पानी, जिसकी कमी ने इस स्कूल की 430 से अधिक बच्चियों की पढ़ाई, सेहत और दिनचर्या को मुश्किल बना दिया था। बड़कागांव प्रखंड का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहा था। कई बार बच्चियों को कक्षाएं छोड़कर पानी की तलाश में जाना पड़ता था। गर्मी के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते थे। शिक्षकों की चिंता अलग थी और अभिभावकों की अलग। सब जानते थे कि पढ़ाई तब ही संभव है, जब बुनियादी जरूरतें पूरी हों।

अदाणी फाउंडेशन की एक पहल, जिसने हालात बदल दिए

इस गंभीर समस्या को देखते हुए अदाणी फाउंडेशन ने गोंदुलपारा खनन परियोजना के तहत स्कूल परिसर में डीप बोरवेल का निर्माण कराया। बोरवेल चालू होते ही स्कूल का माहौल बदलने लगा। अब बच्चियों को शुद्ध पेयजल आसानी से मिल रहा है। पानी के लिए संघर्ष खत्म हुआ, तो पढ़ाई पर ध्यान अपने आप बढ़ गया। एक छात्रा बताती है कि पहले प्यास लगने पर मन पढ़ाई में नहीं लगता था। अब क्लास में बैठकर आराम से पढ़ पाते हैं। यही बदलाव इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।

पढ़ाई के साथ सेहत की भी चिंता

अदाणी फाउंडेशन की पहल केवल पानी तक सीमित नहीं रही। स्कूल में सोलर लाइट की व्यवस्था की गई, ताकि बिजली की समस्या पढ़ाई में रुकावट न बने। इसके साथ ही बच्चियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शुरू हुआ। ब्लड टेस्ट, सामान्य जांच, आंखों की जांच और चिकित्सकीय सलाह से छात्राओं को अपनी सेहत के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कई बच्चियों को पहली बार अपने ब्लड ग्रुप की जानकारी मिली। यह छोटी बात लग सकती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह जानकारी जीवन के लिए अहम साबित हो सकती है। पहले के वर्षों में बच्चियों को जूते भी दिए गए थे, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का ख्याल रखा जा सके।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

स्कूल की कुछ बच्चियां अब सिलाई मशीन पर काम करना सीख रही हैं। यह पहल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक छोटा लेकिन मजबूत कदम है। पढ़ाई के साथ कौशल सीखने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अब अपने भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा आश्वस्त नजर आती हैं।

इकोनॉमिक्स में लौटी समझ

स्कूल में लंबे समय से इकोनॉमिक्स शिक्षक की कमी थी। इसका असर परीक्षा परिणामों में साफ दिखता था। अदाणी फाउंडेशन ने इस समस्या को समझा और पिछले दो वर्षों से आर्थिक मदद के जरिए इकोनॉमिक्स शिक्षक की व्यवस्था कराई। नतीजा यह हुआ कि छात्राओं की इकोनॉमिक्स में समझ बेहतर हुई और उनके मार्क्स भी सुधरने लगे।

स्कूल प्रबंधन की संतुष्टि

स्कूल की प्रिंसिपल किरण कुमारी कहती हैं कि इन प्रयासों से बच्चियों को सीधा लाभ मिला है। पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है और छात्राओं में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उनका मानना है कि जब किसी स्कूल में सुविधाएं बढ़ती हैं, तो उसका असर सिर्फ परिणामों में नहीं, बल्कि सोच में भी दिखता है।

आसपास के स्कूलों तक असर

अदाणी फाउंडेशन ने पहले भी हरली हाई स्कूल में बेंच और डेस्क उपलब्ध कराए हैं। अब चंदौल मध्य विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इससे साफ है कि यह प्रयास किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं हैं।

बदलाव की यह कहानी

बड़कागांव प्रखंड में अदाणी फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और कौशल विकास से जुड़े कई कार्य कर रहा है। स्वास्थ्य शिविर, शैक्षणिक सहयोग और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों से इलाके में धीरे धीरे बदलाव दिख रहा है।

इसे भी पढ़ें : तीन महीने की अदाणी स्किल ट्रेनिंग और जिंदगी भर का सहारा… जानें

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