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Ranchi : जब प्यार और भरोसे की गहराई पर सवाल उठता है, तो कभी-कभी न्याय भी सोचने पर मजबूर हो जाता है। राजधानी रांची के बुढ़मू थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया। मतीयास सांगा और उनकी महिला साथी ने लगभग दस वर्षों तक साथ जीवन बिताया। एक दूसरे का सहारा बने, एक-दूसरे के सुख-दुख में साथी रहे। इस दौरान दोनों के बीच देह से देह का रिश्ता भी बना। एक बार नहीं कई बार बना। दोनों लिव-इन रिलेशनशिप का अनुभव कर रहे थे। लेकिन इसी लंबे साथ के बीच अचानक मतीयास पर रेप और आपराधिक न्यासभंग का इल्जाम लग गया। इल्जाम लगाने वाला कोई दूसरा नहीं, बल्कि साथ रह रही उसकी महिला साथी थी।
इल्जाम लगते ही भेज दिया गया जेल
इल्जाम लगते ही FIR दर्ज की गयी और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मतीयास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अचानक दस साल के साथ, उनके लिए यह एक गहरा झटका था। न्याय की उम्मीद में उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और क्रिमिनल रिट याचिका दायर की। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सुनवाई की। अदालत ने देखा कि दोनों ने लंबे समय तक सहमति से साथ जीवन बिताया है और इस दौरान शारीरिक संबंध भी थे। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों महेश्वर टिग्गा बनाम राज्य झारखंड और सोनू उर्फ सुभाष कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कहा कि दीर्घकालीन संबंध में सहमति स्वतः सिद्ध होती है।
कोर्ट ने रद्द किया दर्ज FIR
अदालत ने कहा कि इस तरह की आपराधिक कार्रवाई का लगातार जारी रहना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसके बाद हाईकोर्ट ने पूरी प्राथमिकी और उसके समस्त आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। इस फैसले ने मतीयास को बड़ी राहत मिली है। वहीं, न्याय पर लोगों का भरोसा और बढ़ गया है।
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