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Home » NIA का बड़ा खुलासा : भारत में आतंक की जमीन तैयार करने में जुटा था झारखंड का फैजान
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NIA का बड़ा खुलासा : भारत में आतंक की जमीन तैयार करने में जुटा था झारखंड का फैजान

January 22, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के पाकिस्तानी हैंडलरों द्वारा भारत में नेटवर्क खड़ा करने और युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर ले जाने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। रांची एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की जांच में सामने आया है कि झारखंड के लोहरदगा निवासी फैजान आईएसआईएस के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन चुका था। वह सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए पाकिस्तानी और विदेशी आतंकियों से लगातार संपर्क में था।

एनआईए ने हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में फैजान के आईएसआईएस से जुड़े कई खतरनाक लिंक और गतिविधियों का जिक्र किया है। जांच के अनुसार, उसका मकसद भारत में हिंसक आतंकी घटनाओं को अंजाम देना और खासकर नव धर्मांतरित युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आईएसआईएस में भर्ती करना था।

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सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए संपर्क

एनआईए की जांच में पता चला है कि फैजान इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए आईएसआईएस के बड़े आतंकियों से जुड़ा था। वह सैफुल्लाह और अब्दुल्ला जैसे पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था। खुद को जांच एजेंसियों से बचाने के लिए वह डार्क वेब, टॉर ब्राउज़र और वीपीएन का इस्तेमाल करता था।

2022 में शुरू हुआ पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़ाव

साल 2022 में फैजान को पाकिस्तान के एक सलाफी मदनी नाम की प्रोफाइल के जरिए टेलीग्राम ग्रुप का लिंक मिला। इस ग्रुप को वॉल्फ, हमजा, अब्दुल्ला और जमील नाम के लोग चला रहे थे। इस ग्रुप में आईएसआईएस से जुड़ी वीडियो, ऑडियो और प्रचार सामग्री डाली जाती थी। फैजान भी ‘फैज एक्सयूएक्स’ आईडी से इन ग्रुपों में सक्रिय था और खुद भी आतंकी विचारधारा का प्रचार करता था।

बाद में उसे ग्रुप का एडमिन भी बना दिया गया। आतंकी सामग्री के कारण जब टेलीग्राम ने इस ग्रुप को बंद किया, तो पाकिस्तानी हैंडलर हमजा ने वर्चुअल नंबर के जरिए नया ग्रुप बनाया। फैजान ने ‘पेन’ नाम की आईडी बनाकर दोबारा गतिविधियां शुरू कर दीं। इसी आईडी से वह आईएसआईएस के बड़े आतंकी सैफुल्लाह, जिसे वह ‘अबू सैफ’ के नाम से जानता था, के संपर्क में आया।

देश के अंदर भी फैलाया नेटवर्क

फैजान ने भारत में भी आईएसआईएस का नेटवर्क फैलाने की कोशिश की। उसने मुंबई के अफजल हनीफ अल्वी समेत कई युवाओं को इंस्टाग्राम ग्रुप से जोड़ा। वर्ष 2021-22 में उसने ‘जुम्मन मुस्लिम’ नाम से इंस्टाग्राम पर एक ग्रुप बनाया, जहां आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार किया जाता था।

जम्मू में इस ग्रुप से जुड़े एक युवक की गिरफ्तारी के बाद यह ग्रुप डिलीट कर दिया गया। इसके बाद फैजान को ‘एडम टेक’ नाम के आईएसआईएस ऑपरेटिव के जरिए नया वर्चुअल नंबर मिला। इसी के जरिए वह बिहार के सिवान और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के युवाओं के संपर्क में आया। गोरखपुर के तारीक को बाद में यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया था।

ऑनलाइन ली ISIS के खलीफा की शपथ

जांच में यह भी सामने आया है कि फैजान ने ऑनलाइन ही आईएसआईएस के प्रति वफादारी की शपथ ली थी। वह इंस्टाग्राम पर एडम टेक के संपर्क में आया और उसी के जरिए उसने आईएसआईएस के खलीफा अबू हुसैन अल-हाशिमी अल-कुरैशी के प्रति निष्ठा की कसम खाई। शपथ के बाद उसे आगे के निर्देशों के लिए एक खास वर्चुअल नंबर दिया गया था।

पढ़ाई में नाकामी के बाद बढ़ा कट्टरपंथ की ओर

एनआईए के मुताबिक, फैजान की कट्टरता की शुरुआत उसकी पढ़ाई में असफलता से हुई। रांची के किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला न मिलने से वह निराश हो गया था। इसके बाद उसने सऊदी अरब की मदीना यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सपना देखा, लेकिन आधार कार्ड में जन्मतिथि से जुड़े विवाद के कारण उसका पासपोर्ट नहीं बन सका। इस दौरान वह यूट्यूब और सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी प्रचारकों के वीडियो देखने लगा और धीरे-धीरे सलाफी जिहादी विचारधारा के प्रभाव में आ गया।

अलीगढ़ में दीवार पर बनाया था आईएसआईएस का प्रतीक

फैजान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रहकर भी साजिश रच रहा था। लोहरदगा और अलीगढ़ में उसके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान चौंकाने वाले सबूत मिले। अलीगढ़ के एक लॉज में वह जिस कमरे में रहता था, उसकी दीवार पर उसने आईएसआईएस के झंडे का प्रतीक बना रखा था। मकान मालिक के विरोध करने पर उसने वह कमरा खाली कर दिया था।

भारत में हमला कर विदेश जाने की थी योजना

एनआईए के अनुसार, फैजान का प्लान भारत में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के बाद आईएसआईएस के किसी विदेशी संघर्ष क्षेत्र में चला जाना था। वह मुस्लिम युवाओं, खासकर नव धर्मांतरित युवाओं को बहला-फुसलाकर आईएसआईएस के स्लीपर सेल में शामिल करना चाहता था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के आसपास रहकर उसने बिहार और उत्तर प्रदेश के कई छात्रों को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की थी।

इसे भी पढ़ें : NIA ने कुख्यात माओवादी को दबोचा, जेलों से नक्सली नेटवर्क जोड़ने की प्लानिंग बेनकाब

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