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Garhwa (Nityanand Dubey) : अरंगी गांव का सरकारी स्कूल इन दिनों पढ़ाई से ज्यादा एक सवाल की वजह से चर्चा में है। सवाल यह कि जो चावल बच्चों की थाली में जाना था, वह अगर बाजार की ओर मुड़ जाए तो जिम्मेदार कौन है? खरौंधी प्रखंड के पीएम श्री मध्य विद्यालय, अरंगी में मध्याह्न भोजन के चावल की कथित अवैध बिक्री की कोशिश ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ नियम तोड़ने का नहीं, बल्कि उन बच्चों के हक पर हाथ डालने का है जिनके लिए स्कूल का खाना कई बार दिन का सबसे पक्का भोजन होता है।
गरीब की थाली सबसे आसान निशाना
गांव के ज्यादातर परिवार मजदूरी पर निर्भर हैं। कई घरों में सुबह यह भरोसा रहता है कि बच्चा स्कूल जाएगा तो कम से कम दोपहर का खाना तय है। ऐसे में अगर उसी अनाज पर कालाबाजारी की नजर हो, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, संवेदनहीनता है। एक अभिभावक ने गुस्से में कहा, “हमारे बच्चों के हिस्से का अनाज कोई बेचेगा, तो यह चोरी से भी बड़ा अपराध है।” गांव में यही भावना साफ दिख रही है।
प्रिंसिपल सस्पेंड, डीसी बोले…
मामला सामने आते ही जिला प्रशासन ने जांच कराई। रिपोर्ट में प्रधानाध्यापक की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद डीसी दिनेश यादव ने संबंधित प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। डीसी ने दो टूक कहा है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने साफ संकेत दिया कि जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं
यह घटना बताती है कि निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं ढिलाई है। स्कूलों में आने वाले अनाज का स्टॉक कैसे रखा जा रहा है? उसकी जांच कितनी नियमित है? स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो पाती? मध्याह्न भोजन योजना का मकसद कुपोषण से लड़ना और स्कूल ड्रॉपआउट रोकना है। लेकिन अगर इसी योजना में सेंध लगेगी तो सरकार के दावे जमीन पर खोखले नजर आएंगे।
अब सख्ती ही विकल्प
प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच और अन्य संभावित दोषियों की पहचान के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूलों में कड़ी निगरानी की बात कही गई है। जिला प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि सरकारी योजनाओं में कहीं भी गड़बड़ी दिखे तो तुरंत सूचना दें।
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