अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : चाय की चौपाल हो या मोबाइल स्क्रीन पर घूमते व्हाट्सऐप मैसेज, इन दिनों राजधानी रांची में हर तरफ एक ही चर्चा गर्म है। वोटर लिस्ट की विशेष जांच यानी एसआईआर को लेकर चारों तरफ दावों और बयानों की भरमार है। कोई इसे वोटर काटने की साजिश बता रहा है तो कोई पुराने रिकॉर्ड को लेकर नए-नए तर्क गढ़ रहा है। इस पूरी खींचतान के बीच सबसे ज्यादा असमंजस में आम नागरिक है, जिसे यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर सच क्या है और सोशल मीडिया का झूठ क्या। इसी उलझन को सुलझाने के लिए रांची की मेयर रोशनी खलखो ने खुलकर बात रखी है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट पर राजनीति बंद होनी चाहिए, क्योंकि यह पर्ची किसी पार्टी की नहीं बल्कि सीधे आम नागरिक की पहचान और उसके मताधिकार से जुड़ी है।
व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के दावों पर न जाएं, सीधे आयोग की बात सुनें
मेयर का कहना है कि जब भी चुनाव या वोटर लिस्ट के सुधार की बात आती है, तो जानकारी से ज्यादा अफवाहें उड़ने लगती हैं। एसआईआर को लेकर फैलाई जा रही बातों पर उन्होंने स्थिति साफ करते हुए कहा कि चुनाव आयोग पहले ही सब कुछ स्पष्ट कर चुका है। जितने भी फैसले लिए गए हैं, वे आयोग की पूरी सहमति और कानूनी कायदों के दायरे में हैं। ऐसे में मोबाइल पर आने वाले फॉरवर्ड मैसेज या राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप को सच मान लेना खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले लोगों को चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या दफ्तर से सही जानकारी जुटानी चाहिए।
2003 की वोटर लिस्ट और फॉर्म छह की उलझन का यह है सीधा समाधान
वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट और फॉर्म छह को लेकर शहर में कई तरह की बातें तैर रही हैं। इसे लेकर आम लोग परेशान हैं कि कहीं उनका नाम कट तो नहीं जाएगा। रोशनी खलखो ने इस पर तसल्ली देते हुए कहा कि पुराने रिकॉर्ड का इस्तेमाल केवल पहचान को पुख्ता करने के लिए होता है। जिन परिवारों के पास पुराने दस्तावेज या ब्योरा मौजूद है, वे आराम से अपने मौजूदा नाम और पते की जांच कर लें। फॉर्म छह और उसके घोषणा पत्र को लेकर डरने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है। नियमों को पेचीदा बनाने के बजाय लोगों को आसान भाषा में यह समझाना जरूरी है कि वे तय फॉर्म भरकर अपने नाम को सुरक्षित कैसे रख सकते हैं।
सियासत अपनी जगह, पर अपनी पर्ची दुरुस्त कराना खुद की जिम्मेदारी
लोकतंत्र में सवाल पूछने का हक हर किसी को है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हर दल अपनी बात रखता है। लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की प्रक्रिया को राजनीतिक अखाड़ा बना देने से केवल आम जनता का नुकसान होता है। मेयर ने अपील की है कि लोग दलों के चश्मे से इस मसले को देखना बंद करें। अगर किसी के नाम की स्पेलिंग, पिता या पति का नाम, मकान नंबर या परिवार के ब्योरे में कोई भी गलती है, तो वे तुरंत सरकारी प्रक्रिया पूरी करके उसे ठीक करवाएं। जब तक नागरिक खुद आगे आकर अपने नाम की जांच नहीं करेंगे, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। सही समय पर कदम उठाना ही अपने वोट को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय है।
इसे भी पढ़ें : 6 महीने पुरानी अदावत का नतीजा है SI के बेटे का म’र्डर



