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Chatra : झारखंड के चतरा जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान में शुक्रवार को एक ऐसा पल आया, जिसने पुलिस के लिए खुशी की लहर पैदा कर दी। नक्सली संगठन TSPC के एरिया कमांडर कुणाल उर्फ कुलदीप और नक्सली रोहिणी गंझू ने हथियार डालकर मुख्य धारा में लौटने का फैसला किया।
संघर्ष के साल, अकेलापन और डर की कहानी
कुणाल और रोहिणी के लिए नक्सल जीवन आसान नहीं था। लगातार पुलिस और सेना की कार्रवाई, छिपकर रहने की मजबूरी और परिवार से दूर रहना उनके लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की चुनौतियां लेकर आया। इसी बीच एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने उनके साथ लंबी बातचीत की। पुलिस अधिकारी ने न केवल नियम और कानून की बात की, बल्कि उन्हें मुख्य धारा में लौटने और अपने जीवन को नया अवसर देने का भरोसा दिलाया। पुलिस के इस मानवीय दृष्टिकोण ने नक्सलियों के दिल में बदलाव की चिंगारी जलाई।
हथियारों के साथ आत्मा का बोझ भी गिरा
आत्मसमर्पण के दौरान दोनों नक्सलियों ने पुलिस को अपने पास के हथियार सौंपे – एक एसएलआर, एक सेमी ऑटोमैटिक राइफल और लगभग 200 राउंड जिंदा कारतूस। यह केवल हथियार नहीं थे, बल्कि सालों की हिंसा, डर और संघर्ष का प्रतीक भी थे। इन्हें पुलिस के हवाले करना, उनके लिए जीवन का नया अध्याय खोलने जैसा था।
मुख्य धारा में लौटना – एक नई शुरुआत
नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने यह दिखाया कि हिंसा और भय की जिंदगी हमेशा विकल्प नहीं होती। मुख्य धारा में लौटकर कुणाल और रोहिणी अब समाज और अपने परिवार के लिए योगदान देने का अवसर पा सकते हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें, ताकि अन्य युवा भी सही रास्ते पर लौट सकें।
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