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Tehran : अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए जा रहे हमले अब छठे दिन में पहुंच गए हैं। हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इजराइल और अमेरिका जहां ईरान के सैन्य ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं, वहीं ईरान भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाब दे रहा है।
अमेरिकी सबमरीन ने ईरानी युद्धपोत को डुबोया
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने बताया कि एक अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के पास ईरान के फ्रिगेट आईआरआईएस डेना को निशाना बनाकर डुबो दिया। इस जहाज पर करीब 180 नाविक सवार थे। इनमें से 32 लोगों को बचा लिया गया है जबकि 87 शव बरामद किए गए हैं। कई नाविक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद समुद्री क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ट्रंप की सैन्य कार्रवाई पर अमेरिकी सीनेट का फैसला
इस बीच अमेरिका की राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर हलचल तेज है। अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को सीमित करने के लिए लाए गए वॉर पावर्स प्रस्ताव को वोटिंग के जरिए खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि फिलहाल ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की खुली छूट मिल गई है।
तेहरान और यरुशलम में धमाकों की गूंज
ईरान की राजधानी तेहरान में बुधवार सुबह कई धमाके सुनाई दिए। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने इसकी पुष्टि की है। इजराइल ने कहा है कि उसने ईरानी नेतृत्व और सुरक्षा बलों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और आसपास के इलाकों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे। इजराइली सेना ने बताया कि इन हमलों को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को तुरंत सक्रिय किया गया। यरुशलम के आसपास भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
500 से ज्यादा मिसाइलें और 2000 ड्रोन दागे
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख नेवी एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक ईरान अब तक 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 2000 ड्रोन लॉन्च कर चुका है। इन हमलों ने पूरे इलाके में डर और अस्थिरता का माहौल बना दिया है।
तेल की कीमतों में उछाल, बाजार में गिरावट
युद्ध का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही पर ईरान के कड़े नियंत्रण की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। यह कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 13 प्रतिशत बढ़ चुकी है और जुलाई 2024 के बाद सबसे ज्यादा है। तेल की कीमतों में इस तेजी के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली है। निवेशकों को डर है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है और कंपनियों के मुनाफे घट सकते हैं।
खाड़ी देशों में भी बढ़ा खतरा
इस तनाव का असर खाड़ी देशों में भी दिख रहा है। सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर मंगलवार को ड्रोन हमले हुए। इसके बाद अमेरिका ने एहतियात के तौर पर अपने गैर जरूरी सरकारी कर्मचारियों को राजधानी छोड़ने की अनुमति दे दी है।
ईरान में अब तक 1040 लोगों की मौत
युद्ध के इन छह दिनों में ईरान में करीब 1040 लोगों के मारे जाने की खबर है। इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें लेकर पहले कहा गया था कि वे देश के भविष्य के नेता हो सकते हैं। इजराइल ने भी साफ कर दिया है कि वह तेहरान में ईरानी सुरक्षा बलों और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर हमले जारी रखेगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि यह युद्ध अभी और लंबा खिंच सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
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