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New Delhi : झारखंड कैडर के सीनियर IAS अधिकारी (सेवानिवृत्त) अमित खरे को भारत के उपराष्ट्रपति का सचिव नियुक्त किया गया है। नियुक्ति मामलों की कैबिनेट समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने नियुक्ति की मंजूरी दे दी है। उन्हें केंद्र सरकार के सचिव के पद और वेतनमान के बराबर दर्जा दिया गया है। यह नियुक्ति अनुबंध के आधार पर की गई है, जिसकी अवधि तीन साल होगी। कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से यह अवधि मानी जाएगी। सरकार आवश्यकता पड़ने पर इसमें बदलाव कर सकती है।
कौन हैं अमित खरे?
अमित खरे भारतीय प्रशासनिक सेवा के तेज-तर्रार अधिकारी माने जाते हैं। उन्होंने अपने 36 बरस के लंबे प्रशासनिक कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे सूचना एवं प्रसारण सचिव और शिक्षा सचिव जैसे अहम पदों पर केंद्र सरकार में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। नई शिक्षा नीति 2020 को लागू कराने में उनकी अहम भूमिका रही थी। ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक छवि के कारण उनकी पहचान देशभर में बनी।

झारखंड और बिहार से रहा गहरा नाता
झारखंड गठन के बाद IAS अमित खरे राज्य के पहले वाणिज्यकर आयुक्त बने। उन्होंने राज्य में शिक्षा, वित्त और विकास आयुक्त के साथ-साथ राज्यपाल के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी भी संभाली। चाईबासा के उपायुक्त रहते हुए उन्होंने डायन प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया। बिहार कैडर में रहते हुए वे पटना और दरभंगा के जिलाधिकारी भी रहे।
चारा घोटाले का किया था पर्दाफाश
IAS अमित खरे का नाम सबसे ज्यादा 1996 में चर्चित हुआ, जब उन्होंने चाईबासा के डीसी रहते हुए चारा घोटाले का खुलासा किया। इसी मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई और बाद में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र को जेल जाना पड़ा। इस साहसिक कदम ने उन्हें एक ईमानदार और निर्भीक अधिकारी की पहचान दिलाई।
रांची से की स्कूल की पढ़ाई
अमित खरे का जन्म वर्ष 1961 में हुआ। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई रांची के हिनू स्थित केंद्रीय विद्यालय से हुई और आगे की पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से की। उनके बड़े भाई अतुल खरे भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी रहे हैं। उनकी पत्नी निधि खरे भी आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले मंत्रालय में अपर सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
मीडिया से भी रहा जुड़ाव
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए वे सूचना एवं प्रसारण सचिव भी रहे। उनके कार्यकाल में ही झारखंड में दूरदर्शन और कई सैटेलाइट चैनलों की शुरुआत हुई। उनके प्रशासनिक अनुभव और दूरदर्शी सोच ने उन्हें हमेशा अलग पहचान दिलाई।
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