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Ramgarh : झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में में शुमार रहे दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को उनका पैतृक गांव नेमरा एक बार फिर इतिहास का गवाह बना। लुकैयाटांड में सुबह से ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। दूर-दराज के गांवों से लोग अपने नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। हर तरफ गुरुजी के जयकारे सुनाई दिए और पूरा इलाका श्रद्धा, भावनाओं और राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गया। सीएम हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर 14 फीट ऊंची शिबू सोरेन की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद उन्होंने परिवार के सदस्यों, मंत्रियों, विधायकों और अन्य अतिथियों के साथ प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर गुरुजी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान झारखंड आंदोलन के संघर्ष और अलग राज्य बनाने में शिबू सोरेन की भूमिका को याद किया गया।
श्रद्धांजलि के साथ विकास का संदेश
कार्यक्रम सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा। प्रतिमा अनावरण के बाद विकास मेला और परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुकों को परिसंपत्तियां सौंपीं। साथ ही कई विकास योजनाओं का ऑनलाइन उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। सरकार की कोशिश रही कि गुरुजी की पहली पुण्यतिथि को सिर्फ स्मृति दिवस नहीं, बल्कि विकास और जनकल्याण से जोड़कर यादगार बनाया जाए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने भी हिस्सा लिया।
10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सोना सोबरन मेमोरियल स्कूल परिसर में करीब 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। विशाल पंडाल, एलईडी स्क्रीन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी इंतजाम पहले से किए गए थे ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। लुकैयाटांड और आसपास के इलाके में पुलिस बल की तैनाती की गई। ट्रैफिक व्यवस्था, पार्किंग और भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी गई थी। आने-जाने वाले वाहनों के लिए विशेष रूट प्लान भी लागू किया गया।
राजनीति और समाज के बड़े चेहरे रहे मौजूद
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, सांसद, विधायक, झारखंड आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और सोरेन परिवार के सदस्य शामिल हुए। कांग्रेस और राजद के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने गुरुजी को झारखंड की पहचान और संघर्ष का प्रतीक बताते हुए उनके योगदान को याद किया। नेमरा का लुकैयाटांड मंगलवार को पूरे झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। श्रद्धा, सम्मान और विकास के संदेश के बीच हजारों लोगों ने अपने प्रिय नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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