अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pawan Thakur
रांची के रातू रोड का इलाका, मॉल ऑफ रांची की जगमगाहट और ठीक बगल में ऊंची इमारत प्रार्थना हाइट्स। इसी इमारत के एक कमरे में टंगा था बड़ा सा बोर्ड, जिस पर लिखा था शुभ यात्रा ट्रैवल्स। दफ्तर ऐसा कि कोई भी पहली नजर में देखकर धोखा खा जाए। अंदर सोफे, मेज पर सजी फाइलें और सामने बैठा मुस्कुराता हुआ शख्स, जो शहर भर के गाड़ी मालिकों को यह सपना दिखाता था कि घर बैठे उनकी चारपहिया गाड़ी हर महीने छप्पर फाड़ कमाई कराएगी। पर किसी को क्या खबर थी कि जिस दफ्तर का नाम शुभ यात्रा रखा गया है, वहां गाड़ी सौंपते ही मालिक की गाढ़ी कमाई की गाड़ी हमेशा के लिए अंधेरी गलियों में गुम हो जाएगी। पर्दे के पीछे यह कोई ट्रैवल्स एजेंसी नहीं, बल्कि गाड़ियों को बंधक रखकर मोटी रकम ऐंठने वाला एक शातिर अड्डा था, जिसका खेल अब पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है।
पहले महीने खाते में आया पूरा किराया, फिर अचानक कट गया फोन
शुभ यात्रा ट्रैवल्स के जाल में फंसने की कहानी हर शिकार के लिए लगभग एक जैसी ही थी। एजेंसी का कर्ताधर्ता विश्वजीत कुमार सिंह उर्फ विक्की, उसकी पत्नी ज्योति कुमारी और साथी मनोज कुमार जब किसी गाड़ी मालिक से मिलते, तो बातचीत का अंदाज पूरी तरह पेशेवर होता था। वे बाजार से कहीं ज्यादा भाड़ा देने का दावा करते थे। भरोसे की नींव इतनी पक्की की जाती कि बाकायदा स्टांप पेपर पर लिखा-पढ़ी होती, लीगल एग्रीमेंट बनता और मालिक के हाथ में कागजात थमा दिए जाते।
शुरुआती एक-दो महीने तक खेल बिल्कुल प्लान के मुताबिक चलता। तय तारीख पर गाड़ी मालिक के बैंक खाते में पूरा किराया पहुंच जाता। मालिक खुश कि बिना किसी झंझट के गाड़ी बंधी-बंधाई कमाई दे रही है। पर जैसे ही मालिक का भरोसा पक्का होता और वह निश्चिंत होकर बैठ जाता, शुभ यात्रा का असली चेहरा सामने आता था। तीसरे महीने से किराया आना बंद। मालिक ने फोन मिलाया तो रिंग बजती रही, फिर फोन कटना शुरू हुआ और कुछ दिनों में नंबर हमेशा के लिए बंद। परेशान मालिक जब प्रार्थना हाइट्स वाले दफ्तर पहुंचता, तो वहां ताला लटका मिलता था।
दफ्तर से निकलती थी कार और रात के अंधेरे में तय होता था बंधक का सौदा
किराए पर ली गई इन गाड़ियों के साथ दफ्तर के भीतर असल में क्या होता था, इसका खुलासा पुलिस की पूछताछ में हुआ। विश्वजीत और उसकी टीम गाड़ी हाथ में आते ही उसे टूर पर भेजने के बजाय किसी तीसरे खरीदार की तलाश में लग जाती थी। रांची, रामगढ़ या आसपास के ग्रामीण इलाकों में ऐसे लोगों को खोजा जाता था जो कम पैसे में लग्जरी गाड़ी अपने दरवाजे पर खड़ी करना चाहते थे।
शुभ यात्रा ट्रैवल्स का गिरोह इन गाड़ियों को उन अनजान लोगों के पास मजबूरी का बहाना बनाकर या फर्जी एग्रीमेंट के दम पर तीन लाख, पांच लाख या आठ लाख रुपये में बंधक रख देता था। गाड़ी मालिक को लगता था कि उसकी फॉर्च्यूनर या बलेनो किसी बड़े अफसर या कंपनी के काम में दौड़ रही है, जबकि हकीकत में वह किसी दूसरे के अहाते में बंधक बनकर खड़ी होती थी। गिरोह एक झटके में एक-एक गाड़ी से लाखों की मोटी रकम अपनी जेब में भर लेता था।
हरचंडा के सनी पहुंचे थाने और ताश के पत्तों की तरह ढह गया नेटवर्क
इस पूरे फरेब की दीवार तब गिरी जब ओरमांझी थाना क्षेत्र के हरचंडा निवासी सनी कुमार सीधे थाने पहुंच गए। सनी ने अपनी फॉर्च्यूनर और सेल्टोस जैसी दो महंगी गाड़ियां इसी शुभ यात्रा ट्रैवल्स के हवाले की थीं। जब कई हफ्तों तक किराया नहीं मिला और विश्वजीत, ज्योति व मनोज के फोन बंद आने लगे, तो सनी ने अपने स्तर से सुराग जुटाना शुरू किया। उन्हें पता चला कि उनके साथ कोई छोटी-मोटी धोखाधड़ी नहीं हुई है, बल्कि शहर में दर्जनों लोगों की गाड़ियां इसी दफ्तर की चौखट लांघकर गायब हो चुकी हैं।
ओरमांझी पुलिस ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए फौरन जाल बिछाया। तकनीकी जांच और मुखबिरों की मदद से पुलिस की टीम खेलगांव स्थित त्रिवेणीपुरम सोसाइटी के फ्लैट नंबर जी-3 में जा धमकी। वहां से विश्वजीत और उसकी पत्नी ज्योति को धर दबोचा गया, जबकि उनके तीसरे साथी मनोज को धुर्वा के जेपी मार्केट इलाके से उठाया गया। सख्ती से पूछताछ हुई तो शुभ यात्रा के दफ्तर का पूरा कच्चा चिट्ठा बाहर आ गया। पुलिस ने इन शातिरों की निशानदेही पर सनी की फॉर्च्यूनर समेत एक आई-10, एक फ्रॉन्क्स और एक बिल्कुल नई बिना नंबर वाली बलेनो बरामद कर ली।
ट्रैवल्स संचालक का मुखौटा पहने बैठा था 9 मुकदमों का पुराना खिलाड़ी
जब पुलिस ने शुभ यात्रा ट्रैवल्स चलाने वाले विश्वजीत का इतिहास खंगाला, तो खाकी वर्दी वाले भी दंग रह गए। खुद को सीधा-साधा ट्रैवल कारोबारी बताने वाला यह शख्स असल में बिहार के मुंगेर से लेकर रांची तक अपराध का पुराना रिकॉर्ड समेटे हुए था। उसके खिलाफ नामकुम, कांके, ओरमांझी और मुंगेर के अलग-अलग थानों में हत्या के प्रयास, रंगदारी, अवैध हथियार रखने और लूटपाट से जुड़े कुल नौ मुकदमे पहले से दर्ज निकले।
वह पहले भी जेल की हवा खा चुका था, लेकिन इस बार उसने सीधे अपराध के बजाय शुभ यात्रा ट्रैवल्स का सफेदपोश चोला ओढ़ लिया था ताकि किसी को शक न हो। वहीं उसका साथी मनोज भी मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी के मामले में नामजद रह चुका था। फिलहाल पुलिस ने शुभ यात्रा ट्रैवल्स के इस पूरे फर्जीवाड़े पर ताला जड़ दिया है और उन लोगों की तलाश में दबिश दे रही है, जिनके पास इन जालसाजों ने बाकी गाड़ियां बंधक रखकर पैसे उठाए थे।
इसे भी पढ़ें : फर्जी दाखिल-खारिज की अर्जी रद्द की, तो कर दी राजस्व कर्मचारी की हत्या, 3 अरेस्ट



