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Ranchi : मोबाइल स्क्रीन पर आया एक मैसेज। उसमें लिखा था, फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करें और कम समय में मोटा मुनाफा कमाएं। आज के दौर में ऐसे संदेश आम लगते हैं। कई लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग बेहतर कमाई की उम्मीद में भरोसा कर बैठते हैं। झारखंड में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को बड़े मुनाफे का सपना दिखाकर साइबर ठगों ने 8 करोड़ 52 लाख रुपये की चपत लगा दी।
भरोसा जीतने का नया तरीका, ‘सर, आपका पैसा तेजी से बढ़ रहा है’
CID DSP नेहा बाला के मुताबिक, पीड़ित को व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया गया। उसे FXPROGROUP-cc नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। वहां माहौल ऐसा बनाया गया, जैसे कोई बड़ा निवेश समुदाय काम कर रहा हो। ग्रुप में निवेश की बातें होती थीं। बड़े रिटर्न के दावे किए जाते थे। स्क्रीनशॉट और आंकड़ों के जरिए यह भरोसा दिलाया गया कि पैसा तेजी से बढ़ रहा है। इसके बाद पीड़ित को एक वेबसाइट के जरिए निवेश करने के लिए कहा गया। यहीं से असली खेल शुरू हुआ।
छोटे भरोसे से बड़ी ठगी तक
साइबर अपराधियों की चाल यही होती है। पहले वे सामने वाले का भरोसा जीतते हैं। शुरुआत में कुछ फर्जी मुनाफा दिखाते हैं, ताकि शिकार को लगे कि सब कुछ सही चल रहा है। फिर धीरे-धीरे निवेश की रकम बढ़वाते जाते हैं। इस मामले में भी यही हुआ। पीड़ित अलग-अलग तारीखों में अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करता गया। उसे लगता रहा कि उसका पैसा सुरक्षित है और अच्छा मुनाफा दे रहा है। लेकिन असल में वह पैसा ठगों के जाल में फंसता जा रहा था। बताया गया कि जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की, तब बहाने शुरू हो गए। कभी तकनीकी समस्या, कभी प्रोसेसिंग फीस, कभी वेरिफिकेशन का बहाना। धीरे-धीरे साफ हो गया कि जिस प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाया गया था, वह असली नहीं, बल्कि ठगी का जाल था। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करीब 8.52 करोड़ रुपये निकल चुके थे।
झारखंड CID ने UP से दबोचा बड़का ठग
शिकायत मिलने के बाद CID की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच में पता चला कि इस्तेमाल किया गया प्लेटफॉर्म फर्जी था और सिर्फ लोगों को ठगने के लिए बनाया गया था। जांच के दौरान इस गिरोह से जुड़े एक बड़का ठग बृजेश सिंह को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस ने भी सहयोग किया। आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और चेक बुक बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
साइबर अपराध का बदलता चेहरा
DSP नेहा बाला ने कहा कि पहले ठगी का मतलब नकली कॉल, बैंक OTP या लॉटरी घोटाला होता था। अब साइबर अपराधियों ने अपना तरीका बदल दिया है। अब वे निवेश सलाहकार बनकर आते हैं। प्रोफेशनल भाषा बोलते हैं। फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। व्हाट्सऐप ग्रुप चलाते हैं। नकली सफलता की कहानियां दिखाते हैं। यही वजह है कि पढ़े-लिखे और समझदार लोग भी इनके जाल में फंस जाते हैं। DSP ने लोगों से अपील की है कि अगर आप या आपका कोई परिचित साइबर ठगी का शिकार हो जाए, तो तुरंत कार्रवाई करें। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या फिर नजदीकी थाना या साइबर सेल में लिखित शिकायत दें।
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