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Ranchi : रांची का पिस्का मोड़ चौक आज आम दिनों जैसा नहीं था। रोज़ की भागदौड़, गाड़ियों का शोर और दुकानों की चहल-पहल के बीच एक अलग तरह की बेचैनी दिख रही थी। हाथों में तख्तियां, आंखों में सवाल और आवाज में गुस्सा नहीं, बल्कि चिंता थी। चिंता अपने भविष्य की, अपनी पढ़ाई की और उस शिक्षा व्यवस्था की, जिसे लेकर ये छात्र-युवा यहां इकट्ठा हुए थे। UGC के प्रस्तावित कानून के विरोध में छात्र-युवाओं ने आज शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत प्रदर्शन किया। यह कोई राजनीतिक भीड़ नहीं थी, बल्कि वे चेहरे थे जो रोज़ लाइब्रेरी में बैठते हैं, हॉस्टल में साथ रहते हैं और एक-दूसरे के सपनों के साथी हैं।
हम साथ पढ़ते हैं, फिर जाति के नाम पर डर क्यों : बंटी सिंह
प्रदर्शन के बीच खड़े बंटी सिंह राजपूत की आवाज में आक्रोश से ज्यादा दर्द था। उन्होंने कहा कि जब छात्र एक ही क्लास में पढ़ते हैं, एक ही कैंपस में रहते हैं और साथ खाते-पीते हैं, तो बार-बार जाति के नाम पर बांटने की कोशिश क्यों की जा रही है। उनका सवाल सीधा था। एक तरफ सरकार जातिवाद खत्म करने की बात करती है और दूसरी तरफ ऐसे कानून लाए जा रहे हैं, जो समाज को फिर से वर्गों में बांटने का डर पैदा करते हैं। बंटी सिंह ने कहा कि इस कानून के बाद छात्रों की कोई सुरक्षा नहीं बचेगी और कोई भी व्यक्ति जाति के नाम पर झूठा आरोप लगाकर ब्लैकमेल कर सकता है।
जोड़ने की बजाय तोड़ने का हो रहा काम : गौरव सिंह
भीड़ में मौजूद गौरव सिंह कहते हैं कि यह कानून जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा है। उनके मुताबिक छात्र पहले ही पढ़ाई, बेरोजगारी और भविष्य की चिंता से जूझ रहे हैं। ऐसे में अगर कैंपस के भीतर डर का माहौल बनेगा, तो पढ़ाई कैसे होगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी किसी पर कुछ भी आरोप लगा सकता है, तो सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों और युवाओं को ही होगा। इससे आपसी विश्वास टूटेगा और शिक्षा का माहौल खराब होगा।
क्या हमारे अधिकारों की कोई कीमत नहीं : सौरव सिंह
सौरव सिंह का सवाल और भी गहरा था। उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद कानूनों में बड़ी संख्या में मामले झूठे साबित हो चुके हैं। ऐसे में नया कानून लाने से पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या सामान्य और स्वर्ण वर्ग के छात्रों के अधिकारों का कोई महत्व नहीं है। उनका कहना था कि न्याय सभी के लिए होना चाहिए, लेकिन ऐसा कानून नहीं होना चाहिए जिससे निर्दोष लोगों को डर में जीना पड़े।
सिर्फ विरोध नहीं, संवाद की मांग
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि यहां सिर्फ नारे नहीं थे, बल्कि संवाद की मांग थी। शिवम कुमार, विशाल कुमार, योगेश नारायण, राणा सिंह सहित मौजूद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा से जुड़े किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी वर्गों से बातचीत होनी चाहिए। छात्रों का कहना था कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन चुप भी नहीं रह सकते। छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई, तो यह आंदोलन रांची से दिल्ली तक जाएगा।
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