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Ranchi : सुबह का वक्त था। कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल के परिसर में रोज की तरह चहल-पहल थी, लेकिन आज माहौल कुछ अलग था। किताबों और कक्षाओं से बाहर निकलकर बेटियां एक जगह जमा थीं। वजह थी राष्ट्रीय बालिका दिवस और उनके लिए खास तौर पर रखा गया विधिक जागरूकता कार्यक्रम। रांची जिले के बुंडू, मांडर, अनगड़ा और कांके स्थित कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूलों में रांची डालसा की टीम पहुंची थी। मकसद सिर्फ भाषण देना नहीं था, बल्कि बेटियों से सीधे बात करना, उनकी शंकाएं सुनना और उन्हें यह एहसास दिलाना कि कानून उनके साथ खड़ा है।
डर से हक तक की बातचीत
कार्यक्रम के दौरान जब डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने सवाल किया कि क्या कोई जानता है कि बाल विवाह अपराध है, तो कुछ हाथ झिझकते हुए उठे। कई छात्राओं के चेहरे पर सवाल थे, कुछ के मन में डर। राजेश कुमार सिन्हा ने बेहद सहज शब्दों में कहा कि बाल विवाह सिर्फ एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि कम उम्र में शादी से लड़कियों की सेहत, शिक्षा और भविष्य तीनों प्रभावित होते हैं। उनकी बातों में आदेश नहीं था, बल्कि समझाने की कोशिश थी।

कानून की भाषा नहीं, जिंदगी की बात
डालसा सचिव राकेश रौशन ने छात्राओं को बताया कि राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का असली मकसद क्या है। बाल विवाह को रोकना, लड़कियों के लिए बनी सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, समाज को जागरूक करना और यह सुनिश्चित करना कि कोई भी बेटी मजबूरी में अपने सपनों से समझौता न करे। उन्होंने कहा कि अगर कहीं बाल विवाह की आशंका हो, तो चुप न रहें। इसकी सूचना देना भी एक जिम्मेदारी है।
हर स्कूल में अलग कहानी, एक ही संदेश
कांके स्कूल में कार्यक्रम के दौरान पीएलवी और डालसा की टीम ने छात्राओं के साथ खुलकर बात की। बुंडू में वार्डेन और शिक्षकों ने भी अपनी बात रखी और बताया कि शिक्षा ही सबसे मजबूत हथियार है। अनगड़ा में छात्राओं ने सवाल पूछे, अपने अनुभव साझा किए। वहां मौजूद पीएलवी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद उपलब्ध है।
मांडर में मंच पर उतरी जिंदगी
मांडर स्कूल में माहौल और भी जीवंत था। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ विषय पर नुक्कड़ नाटक हुआ। नाटक में एक ऐसी लड़की की कहानी दिखाई गई, जिसकी शादी कम उम्र में तय कर दी जाती है, लेकिन जागरूकता और कानून की मदद से उसका भविष्य बदल जाता है। नाटक खत्म होते ही तालियों की आवाज़ सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं थी, बल्कि उस उम्मीद के लिए थी, जो हर बेटी की आंखों में झलक रही थी।

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